खरेला (महोबा)। जिले में जल जीवन मिशन के तहत कराए जा रहे कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शिवहार ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत पाठा गांव में दो साल पहले निर्मित हुई टंकी टेस्टिंग के दौरान ही लीक हो गई थी, इसे आज तक ठीक नहीं किया गया है। इस लापरवाही के कारण करीब बीस फीसदी घरों तक पीने का पानी नहीं पहुंच पा रहा है। जिन ग्रामीणों को कनेक्शन दिए गए हैं, उनमें से अधिकांश के घरों में नल की टोटियां तक नहीं लगाई गई हैं, इससे पानी बहकर बर्बाद हो रहा है और सड़कें दलदल में तब्दील हो गई हैं। साथ ही, पाइपलाइन डालने के लिए खोदी गई सड़कों को भी दुरुस्त नहीं किया गया है।
जिले में लगभग 1,100 करोड़ रुपये की लागत से जल जीवन मिशन के तहत पांच महत्वपूर्ण पेयजल परियोजनाएं संचालित हैं। कई गांवों में पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़कों को खोदने के बाद उनकी मरम्मत न करने और पर्याप्त पानी न पहुंचने की समस्या ने ग्रामीणों को त्रस्त कर दिया है। इसी अव्यवस्था के चलते 30 जनवरी को महोबा दौरे पर आए जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का चरखारी विधायक बृजभूषण राजपूत ने ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर काफिला रोक लिया था। इस दौरान, जल जीवन मिशन की योजनाओं की जमीनी हकीकत मंत्री के समक्ष रखी गई। विधायक ने अधिकारियों पर गलत रिपोर्टें भेजने का भी गंभीर आरोप लगाया था। इस मामले के शासन स्तर तक पहुंचने के बाद, जलशक्ति मंत्री ने 30 दिनों के भीतर सभी गांवों में सुचारू रूप से पानी उपलब्ध कराने के स्पष्ट निर्देश जारी किए थे।
जलशक्ति मंत्री के निर्देश के बाद से, जल जीवन मिशन के कार्यों की गुणवत्ता और कार्यान्वयन की पोल लगातार खुल रही है। नगाराडांग गांव में टंकी के लीक होने का एक वीडियो सामने आने के बाद, विभागीय अधिकारी उसे ठीक करने में जुट गए हैं। इसी प्रकार की गंभीर समस्या पाठा गांव में शिवहार पेयजल योजना के तहत बनी टंकी के साथ भी सामने आई है। लगभग 252 करोड़ रुपये की लागत वाली शिवहार पेयजल परियोजना के तहत पाठा गांव में निर्मित यह टंकी दो साल पहले टेस्टिंग के समय ही लीक हो गई थी। ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत करने के बावजूद, इसे पूरी तरह से ठीक नहीं किया गया। इस टंकी से पाठा, रिहुनिया, बैहारी, सिजौरा, पुपवारा और गढ़हरी गांवों को पेयजल की आपूर्ति होनी है। ग्रामीणों के अनुसार, टंकी के बीच के हिस्से में लगातार रिसाव हो रहा है, इससे पानी बर्बाद हो रहा है। बैहारी गांव में तो एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जा रही है।
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पाठा के ग्राम प्रधान महेंद्र सिंह का कहना है कि दो साल पहले टंकी टेस्टिंग में लीकेज थी। उस समय जल निगम और कार्यदायी संस्था के ठेकेदार से शिकायत की गई थी। टंकी दुरुस्त करने के नाम पर खानापूर्ति की गई लेकिन लीकेज नहीं रुका। आधे से अधिक टंकी भरने पर पानी का रिसाव शुरू हो जाता है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं कराया गया।
पाठा निवासी महेंद्र प्रताप ने बताया कि गांव में कनेक्शन तो दिए गए लेकिन अधिकांश नलों में टोटियां नहीं लगाई गई। जब आपूर्ति आती है तो पानी बहता रहता है। इससे सड़कें दलदल बन रही हैं। मोहल्ले के दस परिवारों को पानी भी नहीं मिल पा रहा है।
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पाइपलाइन डालने के बाद खोदी सड़कें नहीं हुईं दुरुस्त
बैहारी निवासी प्रदीप सिंह कहते हैं कि गांव में प्रतिदिन की बजाय कभी-कभार ही आपूर्ति होती है। यही हाल सिजौरा गांव का है। गांव के दो रास्तों में पाइपलाइन डालने के बाद खोदी गई सड़कों की आज तक मरम्मत नहीं कराई गई। तीन स्थानों पर लीकेज हैं। जिन्हें दुरुस्त नहीं किया गया। कनेक्शनों में 50 फीसदी टोटियां नहीं लगाई गईं।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जांच कराई जाएगी। कोई कमी मिलने पर उसे दुरुस्त कराया जाएगा।
मोईनुल इस्लाम, अपर जिलाधिकारी नमामि गंगे
फोटो 17 एमएएचपी 05 परिचय-शिवहार ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत पाठा गांव में निर्मित इस टंकी मे
फोटो 17 एमएएचपी 05 परिचय-शिवहार ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत पाठा गांव में निर्मित इस टंकी मे