लाखों की लागत से बनाई गई सब्जी मंडी की दुकानें पशुओं की आरामगाह बन गई है। इसके अलावा बची हुई दुकानों में अवैध कब्जे हो गए हैं। जिससे सरकार को प्रति वर्ष लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है। शटर टूटने से दुकानों में मवेशी घुसे हुए हैं।
कई लोगों ने अतिक्रमण कर दुकानों को गोदाम बना दिया है। पालिका इससे बेखबर है। ढाई दशक पहले पालिका प्रशासन ने सब्जी मंडी में लाखों रुपए की लागत से आधा सैकड़ा से ज्यादा दुकानें बनवाई थी।
शुरुआत में इन दुकानों को पाने के लिए खासी मारामारी मची थी। पालिका ने दुकानों को किराए पर देकर अच्छा खासा राजस्व वसूला था।
पालिका की अनदेखी से खाली पड़ी दुकानों पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया, वहीं कुछ लोगों ने मवेशी बांधने शुरू कर दिए हैं।
अब सब्जी विक्रेताओं ने सब्जी मंडी में दुकानें न लगाकर सब्जी मंडी मार्ग पर दुकानें लगा ली हैं, जिससे मार्ग सकरा हो गया है।
ऐसी स्थिति में लोगों के आवागमन में दिक्कत हो रही है। पालिका की अनदेखी से बीस साल पहले दुकान निर्माण में लगाई गई लागत तक नहीं निकली। इससे सरकार को राजस्व की भारी क्षति हो रही है। पालिका प्रशासन की लापरवाही से दुकानों के शटर टूट गए, वहीं कई दुकानों की शटरें जंग खाकर बर्बाद हो गईं।
पालिका प्रशासन ने सब्जी मंडी की दुकानें बनवाने के बाद ढाई दशक पहले चंद पैसों में दुकानें किराए पर उठाई थी, लेकिन आज तक नगरपालिका के किसी भी अधिकारी कर्मचारी ने दुकानों की दशा देखने की जहमत नहीं उठाई। हालत यह है कि पालिका से सस्ते दामों में दुकान लेकर दूसरों को महंगे दामों पर उठा दिया गया है।
दूसरों के दरवाजे और सड़कों को साफ सुथरा रखने वाले नगर पालिका अपनी जमीन की सफाई नहीं कराता, सब्जी मंडी परिसर में बड़ा कूड़ादान रख दिए जाने से आसपास के लोगों ने कूड़ेदान में कम और उसके अलग बगल में कूड़े का ढेर लगा दिया है, जहां पर सारा दिन गंदगी फैली रहती है।
उपजिलाधिकारी सदर, महोबा ने कहा सब्जी मंडी में बनी दुकानों पर जल्द ही मौके पर पहुंचकर जायजा लिया जाएगा। सड़क के दोनों ओर सब्जी लगाकर अतिक्रमण करने वालों को हटाकर सब्जीमंडी की दुकानों में शिफ्ट कराया जाएगा। साथ ही सब्जी मंडी की बेहतर साफ सफाई कराकर खाली पड़ी दुकानों को किराए पर दिया जाएगा।