कनकुआ (महोबा)। जिले की सरहद पर बने लहच्यूरा बांध के फाटक खोलने से गांव में आने वाले पानी पर अब रोक लग गई है। कारण, धसान नदी में बड़ी चट्टानें कटने से पानी का रुख झांसी क्षेत्र की तरफ हो गया है। नदी से 500 से 700 मीटर की दूरी पर बसे काशीपुरा और लिलवां गांव पहुंची अमर उजाला टीम ने गांवों का जायजा लिया और ग्रामीणों से हकीकत जानी। नदी का जलस्तर बढ़ने से फसलों की बर्बादी को याद कर आज भी यहां के बाशिंदे सिहर उठते हैं।
पूर्व में लहच्यूरा बांध के फाटक खोलने से डूब क्षेत्र में बसे गांव के लोगों की नींद उड़ जाती थी। खेतों के अलावा गांवों में भी पानी घुस जाता था। कुछ वर्षों पूर्व नदी के किनारे बड़ी-बड़ी चट्टानें काटने से अब पानी का बहाव जिले के गांव की तरफ न होकर झांसी क्षेत्र की तरफ हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि अब न तो फसलें जलमग्न होती है और न ही ग्रामीणांचलों में पानी भरने का खतरा है। राजस्व
विभाग द्वारा फाटक खोलने से पहले गांवों में सूचना देने के साथ ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया जाता है। वर्ष 2019 में नदी का जलस्तर बढने से पास में बने टापू में बकरियां चरा रहे ग्राम लिलवां निवासी श्रीपत पाल (40), लालाराम पाल (25), नरेंद्र (18), कंचन साहू (30) पत्नी बालकिशन व ग्राम लखेस्वर निवासी नीरज रैक्वार (28) पुत्र कूरा रैक्वार भी मछलियां पकड़ते समय जलस्तर बढ़ने पर फंस गया। जिन्हें दस घंटे की मशक्कत के बाद निकाला गया था।
ग्राम काशीपुरा निवासी सुरेंद्र सिहं तोमर कहते हैं कि गांव से करीब 500 मीटर दूर से धसान नदी निकली है। धसान नदी में पानी छोड़ने से पहले ग्रामीणों को लेखपाल और महोबकंठ पुलिस द्वारा सूचना दी जाती है। इसके बाद बांध के फाटक खुलते हैं। जिससे ग्रामीण सतर्क रहते हैं। हालांकि, अब कटान के चलते पानी का बहाव झांसी क्षेत्र में हो जाने से यहां पानी आने की संभावना कम हो गई है।
काशीपुरा निवासी श्याम सुंदर मिश्रा कहते हैं कि गांव से 400 मीटर दूर बने शिव मंदिर की सीढ़ियों तक पानी आ जाता है। जब सभी फाटक खुल जाए तब शिव मंदिर के बाहर मैदान में पानी आता है लेकिन अब ग्रामीण पानी की समस्या से बेफ्रिक हैं। कुछ इलाकों में पानी भर जाने से चरवाहे जरूर फंस जाते हैं।
ग्राम लिलवां निवासी भगवान दास बताते हैं कि गांव से नदी 700 मीटर दूर से निकली हैं। जिससे गांव में पानी नहीं आता है और न ही फसल डूबती है। फिर भी लेखपाल और ग्राम प्रधान की सहमति से फाटक खोले जाने से पहले डिग्गी पिटवाकर ग्रामीणों को सचेत कर दिया जाता है।