महोबा। असलहे रखना बुंदेले अपनी शान समझते हैं। कई लोगों के पास तीन-तीन लाइसेंसी शस्त्र हैं। अब नए शासनादेश के तहत 20 से ज्यादा माननीयों समेत तीन दर्जन लोगों से एक-एक शस्त्र वापस लिए जाएंगे। जिला प्रशासन के आदेश पर ग्रामीणांचलों में डुग्गी पिटवाने के अलावा समाचार पत्रों में भी समाचार छपे हैं।
जिले में लगभग सात हजार शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। इनमें से तीन-तीन लाइसेंसी शस्त्र रखने वालों को अब एक-एक शस्त्र शासन के निर्देश पर सरेंडर करना पड़ेगा। कारण, आर्म्स एक्ट 1959 में किए गए संशोधन के बाद गृह मंत्रालय ने एक साथ तीन शस्त्र रखने वालों से एक-एक लाइसेंस सरेंडर कराने की तैयारी शुरू की है। संसोधन के बाद सबसे ज्यादा दिक्कत माननीयों को है। माननीयों, पूर्व सांसद और पूर्व विधायकों व राजनीति से जुड़े लोगों के पास तीन-तीन शस्त्र लाइसेंस हैं। इनमें कुछ पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।
डीएम एके तिवारी ने बताया कि जिले के सभी शस्त्र लाईसेंस धारकों को विशिष्ट पहचान संख्या (यूआईएन) प्रदान किया जाना है। बिना विशिष्ट पहचान संख्या के लाइसेंस अवैध माने जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन शस्त्र लाइसेंस धारकों ने अभी तक अपने शस्त्रों का लाइसेंस पुस्तिका पर विशिष्ट पहचान संख्या का अंकन नहीं कराया है, वे निर्धारित तिथि में शस्त्र अनुभाग कलेक्ट्रेट आवश्यक प्रपत्रों समेत उपस्थित होकर अपना डाटा फीड कराकर शस्त्र लाइसेंस में विशिष्ट पहचान संख्या को अंकित करा लें। अन्यथा उनके शस्त्र अवैध माने जाएंगे। डीएम ने बताया कि अब एक व्यक्ति दो से अधिक शस्त्र नहीं रख सकेगा।
आगे पीछे शस्त्र लेकर चलने की परंपरा होगी खत्म
महोबा। माननीय के आगे पीछे शस्त्र लेकर चलने का चलन अब खत्म हो जाएगा। दो से ज्यादा शस्त्र जारी न करने और तीन शस्त्र धारकों के एक-एक शस्त्र सरेंडर कराने के शासनादेश के बाद अब शस्त्रों के बीच चलने वाले माननीयों की शान-शौकत में कमी आएगी। बुंदेलखंड में कंधे पर बंदूक टांगकर चलने की वर्षों पुरानी परंपरा आज भी चली आ रही है।