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इमरजेंसी में इलाज न मिलने से वृद्घ की मौत

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कोरोना के नाम पर मरीजों की दुर्दशा हो गई है। रविवार को एक वृद्ध की इलाज के अभाव में मौत हो गई।
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जिला प्रशासन द्वारा जिला अस्पताल व आपातकालीन सेवाएं बंद कर देने से गंभीर मरीजों को भी कोरोना महामारी के चलते इलाज नहीं मिल पा रहा है।
जारीगंज निवासी नारायण दास (80) की रविवार को अचानक शुगर लो गई। जिसे उनकी हालत बिगड़ गई।
परिजन इमरजेंसी में ले गए। इमरजेंसी बंद होने पर इलाज न मिलने पर नारायण के बेटे ने डीएम से बात की।
डीएम ने बेलाताल सीएचसी ले जाने की बात कही। समय से इलाज न मिल पाने के कारण उसकी मौत हो गई।
जिला प्रशासन ने जहां इमरजेंसी सेवाएं ठप करा दी हैं। वहीं प्राइवेट डॉक्टरों की प्रैक्टिस पर भी रोक लगा दी है। इससे जिले की सेवाएं चरमरा गई हैं।
24 घंटे के अंदर कई ऐसे केस आए जिसमें मरीजों को उपचार की तत्काल जरूरत थी।
काजीपुरा निवासी शमीम (55) पत्नी अहमद अली की शनिवार की शाम करीब सात बजे अचानक तबियत बिगड़ गई।
बीपी बढ़ जाने, उल्टी बंद न होने और गैस की समस्या से परेशान महिला को परिजन आनन-फानन में जिला अस्पताल की इमरजेंसी में ले गए।
इमरजेंसी बंद होने से इधर-उधर भटकते रहे। एक दवा विक्रेता ने घर से कुछ दवा दे दी। जिससे उसे थोड़ी राहत मिल गई लेकिन बोतल आज तक नहीं चढ़ पाई।
सुुभाषनगर निवासी पेशे से अधिवक्ता मुकेश पाठक की रविवार को सुबह बीपी बढ़ जाने से अचानक तबियत बिगड़ गई।
उनका बेटा जिला अस्पताल लेकर पहुंचा। इमरजेंसी बंद होने पर वह परेशान हो गया। पिता के मित्र डॉ. ज्ञानेश अवस्थी को फोन करने पर उन्होंने घर जाकर उपचार किया। जिससे हालत में सुधार हुआ।
रविवार की शाम को फिर हालत बिगड़ गई लेकिन कहीं पर दवा नहीं मिली। आनन-फानन में उन्हें कानपुर ले जाया गया। जहां उनका उपचार चल रहा है।
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