फोटो 25 एमएएचपी 04 परिचय-जैन मंदिर में प्रवचन के दौरान आराधना करते समाज के लोग। संवाद
महाेबा। शहर के पुरानी सब्जी मंडी स्थित जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के दसवें दिन शुक्रवार को उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की आराधना की गई। आत्मसाधक ब्रह्मचारी शांतानंद ने कहा कि अपने ब्रह्म स्वरूप में आचरण करना ही उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य का अर्थ केवल शरीर की पवित्रता नहीं बल्कि विचार, भावना और दृष्टि की पवित्रता से है। विषयों में आसक्ति छोड़कर आत्मा के स्वरूप में स्थित होना उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म है। ब्रह्मचर्य से तेज, बल, ओज, स्मृति व आध्यात्मिक शक्ति की वृद्धि होती है। दृष्टि, श्रवण, वचन, स्पर्श और मन सभी इंद्रियों को संयमित करना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। प्रवचन के बाद संगीतमय आरती व प्रसाद वितरण किया गया। बच्चों ने धार्मिक गीतों पर नृत्य और नाटक प्रस्तुत किए। समाज के दिलीप जैन ने बताया कि चार अक्तूबर को क्षमावाणी व जिनवाणी पालकी महोत्सव सम्पन्न होगा। इस दौरान अशोक, संतोष, सुदीप, शैलेश, राजेश, सुनील मौजूद रहे।