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नाम का जिला अस्पताल सुविधाएं सीएचसी जैसी नहीं

Wed, 27 May 2015 10:50 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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महोबा। शहर में बने जिला अस्पताल में लोगों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की भी सुविधाएं नहीं मिल रही है। जिससे जिले के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए दूसरे जिले का मुख देखना पड़ता है। 18 साल पहले बने जिला अस्पताल में आज तक 100 बेड भी नहीं मिल पाए है, आज भी महज 50 बेडों से ही अस्पताल का संचालन किया जा रहा है।  
मालूम हो के वर्ष 1997 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महोबा को जिला अस्पताल का दर्जा मिल गया था, लेकिन 18 साल बाद भी अस्पताल को जिला अस्पताल की सुविधाएं नही मिल पा रही है। इलाज के नाम पर 24 डाक्टरों के पद सृजित होने के बाद भी महज 12 डाक्टर की सेवा दे रहे है।  जिससे इलाज के लिए ग्रामीण आंचलों से आए लोगों को डाक्टरों की कमी के चलते मायूस होकर लौटा पड़ता है। जिला अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही है।  जिससे मरीजों को ऑपरेशन आदि के लिए झांसी और कानपुर जैसे जिलों में जाना पड़ता है। जिला अस्पताल के हिसाब से 100 बैड उपलब्ध कराए जाते है। लेकिन जिला अस्पताल में 50 बेड से ही काम चलाया जा रहा है। जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी, और बेड उपलब्ध न होने से मरीजों को इधर उधर भटकना पड़ता है। वहीं जिला अस्पताल में रेडियोलाजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड भी नहीं हो पा रहा है। जिससे मरीजों को मजबूरन बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है। अस्पताल में  फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, चौकीदार और वार्ड ब्वाय के भी पद खाली हैं।
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अस्पताल में विशेषज्ञों की कमी
जिला अस्पताल में बड़े पैमाने पर डाक्टरों की कमी है। यहां पर एनेस्थीसिया, स्किन रोग विशेषज्ञ, नाक, कान, गला, हृदय रोग और चेस्ट विशेषज्ञ, पैथालॉजी विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, रेडियालाजिस्ट, एमएस गायनी, दंत विशेषज्ञ आदि चिकित्सकों के जिला अस्पताल मे न होने से मरीजों को दूसरे जनपद के जिला अस्पतालों में जाना पड़ता है।

तीन- तीन सीएमएस लिख चुके पत्र
जिला अस्पताल के तीन तीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षक पांच सालों से जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए कई बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन शासन स्तर से आज तक डाक्टरों की कमी को पूरा नहीं किया जा सका, जिसका खामियाजा जनपद वासियों को भुगतना पड़  रहा है। जिस डाक्टर ने भी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर कार्यभार ग्रहण किया और शासन को डाक्टरों की कमी के बावत पत्र लिखा, लेकिन डाक्टरों की समस्या जस की तस बनी हुई है।
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बुंदेलखंड में स्थानांतरण होने के बाद भी चिकित्सक कार्यभार ग्रहण नहीं करते, बल्कि अन्य स्थान के लिए स्थानांतरण करा लेते हैं, यही वजह है कि जिला अस्पताल में आज तक डाक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। जिला अस्पताल में आयुष चिकित्सकों से काम चलाया जा रहा है।
- डॉ. एसके वार्ष्णेय, सीएमओ।
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