सांसद के गोद लिए गांव को विकास की दरकार है। यहां की हालत आम गंावों से भी बदतर है। गलियों में कीचड़ भरा है। जगह जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। गांव में कई कई दिन सफाई कर्मचारी नहीं पहुंचता है। एक साल से खुद सांसद ने गांव की सुधि नहीं ली।
हमीरपुर -महोबा- तिंदवारी संसदीय क्षेत्र से सांसद कुंवर पुष्पेंद्र सिंह चंदेल ने अक्टूबर 2014 को विकासखंड कबरई के ग्राम पिपरामाफ को गोद लिया था। उन्होंने नौ जनवरी 2015 को पिपरामाफ को आदर्श गांव बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ बैठक कर सुझाव मांगे थे।
इस पर जिलाधिकारी वीरेश्वर सिंह ने विभागों को कार्य योजना बनाए जाने के निर्देश दिए थे। सांसद के ही योजनाओं की जानकारी न किए जाने से विकास के लिए बनाई गई योजनाएं ठंडे बस्ते में चली गईं।
पिपरामाफ को 20 बिंदुओं पर संतृप्त किया जाना था। विकास में शिक्षा के लिए इंटर कालेज, बैंक, किसानों के लिए सोसाइटी, स्वरोजगार, पशु चिकित्सा केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र, सड़कें, नाली, जन सेवा केंद्र की स्थापना होनी थी। नतीजा सिफर रहा।
गोद लेने के डेढ़ साल बाद भी गांव की स्थिति पहले जैसी ही है। इसमें कोई सुधार नहीं हुआ। सूखे के संकट में गांव के लोग पानी और खानपान की समस्याओं से जूझ रहे हैं। परेशान ग्रामीण रोजी रोटी की तलाश में महानगरों की तरफ पलायन कर रहे हैं। सांसद ने इनके लिए भी कोई पहल नहीं की।
पिपरामाफ गांव में 508 शौचालयों का सांसद के प्रयास से निर्माण कराया गया है। गांव में अस्पताल स्वीकृत है। जमीन न मिलने से निर्माण नहीं हो पा रहा है। बीपीएल कार्डधारकों के घरों में विद्युत संयोजन कराने के साथ साढे़ तीन प्वाइंट फिटिंग नि:शुल्क कराई जा रही है।
बादशाह सिंह , सांसद के कार्यालय प्रभारी