फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के गूंजे जयकारे

Sun, 22 Mar 2015 11:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, महोबा
विज्ञापन
विज्ञापन
नवरात्र के दूसरे दिन शहर के देवी मंदिरों में भक्ताें का भारी सैलाब उमड़ा। इस दौरान देवी मंदिर मां ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा के जयकारों से गूंज उठे। सारा दिन माता की स्तुति का सिलसिला चलता रहा। वहीं पूरे दिन श्रद्धालुआें  के आने जाने वाले भक्तों की कतारें लगी रहीं।
विज्ञापन

 शहर के देवी मंदिर रविवार को दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़  रही। सुबह से ही भक्तों के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया। शहर के बड़ी चंडिका मंदिर, छोटी चंडिका मंदिर, विंध्यवासिनी मंदिर, माहेश्वरी माता मंदिर, शारदा मंदिर, चामुंडा मंदिर, चकौटा देवी मंदिर सहित तमाम देवी मंदिर माता के जयकारों से गूंजते रहे। भक्ताें ने माता की उपासना कर मां से वैभव की मांग की। माता की स्तुति और जयकारों की गूंज से समूचा शहर भक्तिमय हो गया। 
पं. मेवालाल परदेशी ने बताया कि ब्रह्चारिणी देवी ज्ञान, वैराग्य और ध्यान की अधिष्ठात्री हैं। इनका उद्भव ब्रह्मा जी के कमंडल से माना जाता है। ब्रह्मा जी की शक्ति होने से मां का स्वरूप ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। उन्होंने बताया कि  मां चंद्रघंटा के शिख पर चंद्र और हस्त में घंटा है। देवताओं और असुर के बीच हुए संग्राम में देवी ने घंटे की नाद से अनेक असुराें का दमन किया। चंद्रघंटा देवी सुर और संगीत की आराध्य शक्ति हैं।
विज्ञापन


नंगे पांव जाने की परंपरा आज भी कायम
नवरात्र के दिनों में शहर में माता की भक्ति के विभिन्न स्वरूप प्रदर्शित हो रहे हैं। वर्षों पहले से चली आ रही नंगे पांव पैदल चलकर मंदिर जाने की परंपरा आज भी कायम है। यही वजह है कि भोर होते ही महिलाएं और किशोरियां नंगे पांव पैदल चलकर हाथों में पूजा की थाली और तांबे के पात्र में जल लेकर मंदिर पहुंचने लगती हैं। नंगे पांव मंदिर जाने के प्रति भक्तों में खासा उत्साह है।
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें