जिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के मकसद से स्थापित कराए गए लाखों की कीमत के ट्रांसफार्मर शोपीस बने है। फीडर का संचालन न होने से गर्मी के इस मौसम में मरीज बेहाल है। बिजली जाने के बाद जनरेटर भी नहीं चलाया जा रहा। जिससे वार्डों में भर्ती मरीज हाथ वाले पंखे का सहारा ले रहे है। वहीं बिजली न आने से जांचों के लिए मरीजों को प्राइवेट क्लीनिकों में जाना पड़ता है।
छह माह पूर्व जिला अस्पताल में स्वतंत्र फीडर की स्थापना के लिए दो बड़े ट्रांसफार्मर मिले थे। तीन माह तक यह ट्रांसफार्मर अस्पताल परिसर में जंग खाते रहे। इसके बाद इमरजेंसी वार्ड के समीप खाली पड़ी भूमि में ट्रांसफार्मरों की स्थापना कराई गई। जिससे मरीजों को शीघ्र जिला अस्पताल में 24 घंटे बिजली मिलने की उम्मीद जगी थी।
समय बीत जाने के बाद भी स्वतंत्र फीडर का संचालन शुरू न होने से अस्पताल आने वाले मरीजों को दिक्कत हो रही है। भीषण गर्मी व उमस के चलते इस समय जिला अस्पताल के वार्ड मरीजों से भरे हैं। ऐसे में बिजली न होना उन्हें परेशान कर रहा है। वहीं जांचों के लिए मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
स्वतंत्र फीडर की स्थापना की जिम्मेदारी संस्था की है। फीडर कब शुरू होगा। इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। बिजली जाने के बाद जनरेटर चलाया जा रहा है। शिकायत मिलने पर कर्मचारियों को हिदायत दी जाती है। वह स्वयं दिन व रात के समय इमरजेंसी व अन्य वार्डों का भ्रमण कर व्यवस्थाएं परखते है।
डा. उदयवीर सिंह, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल