-कजली मेले में आल्हा गायन में सुन बुंदेलों की फड़की भुजाएं
-बारिश में भी नहीं डिगे मेलाप्रेमी, देर रात तक रही भीड़
फोटो 29 एमएएचपी 23 परिचय-कीरत सागर तट स्थित आल्हा मंच पर आल्हा गायन की प्रस्तुति देते गायक। संवाद
फोटो 29 एमएएचपी 24 परिचय-मेलास्थल कीरत सागर तट पर जुटी मेलाप्रेमियों की भीड़। आरिफ अंसारी
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। खटखट खटखट तेगा बाजे, छापर-छापर चले तलवार, बड़े लड़इया गढ़ महुबे के, जिनसे हार गई तलवार... की गूंज शनिवार को वीर आल्हा ऊदल की नगरी महोबा में गूंजती रही। मौका था ऐतिहासिक कीरत सागर तट पर कजली मेले का। मेला परिसर स्थित आल्हा मंच पर गायकों ने आल्हा गायन पेश किया तो बुंदेलों की भुजाएं फड़क उठीं।
कजली मेले का पहला दिन आल्हा मंच पर पूरी तरह आल्हा गायकों के नाम रहा। आल्हा खंड में वर्णित महोबा के वीरों की महिमा का जमकर बखान हुआ। यशभारती से सम्मानित आल्हा सम्राट वंशगोपाल यादव ने आल्हा गायन पेश किया। उन्होंने आल्हा गायन के माध्यम से बताया कि किस तरह वीर आल्हा-ऊदल ने दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान की सेना को कीरत सागर तट पर हुए युद्ध में खदेड़ा था। उन्होंने आल्हा-ऊदल की 52 लड़ाइयों का वीर रस में वर्णन किया। इस दौरान आल्हा मंच पर पूरे दिन आल्हा गायन का सिलसिला चलता रहा। कभी तलवार भांजकर तो कभी वीर रस से ओतप्रोत सुर और लय के माध्यम से आल्हा गायन पेश किया गया। इसके अलावा अन्य आल्हा गायकों ने भी आल्हा मंच पर आल्हा गायन की प्रस्तुति दी।
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झूलों व खेल तमाशों का उठाया आनंद
फोटो 29 एमएएचपी 25 परिचय-मेले में झूलों का आनंद लेते मेलाप्रेमी। संवाद
महोबा। शहर के प्राचीन कीरत सागर तट पर मेले के पहले दिन लोगों की भारी भीड जुटी। मेला प्रेमियों ने झूलों में खेल तमाशा का आनंद उठाया। इस दौरान महिलाओं ने घरेलू सामग्री की जमकर खरीदारी की। भीड़ अधिक होने के चलते सभी को झूलों के टिकट नहीं मिल सके। मेलास्थल पर विभिन्न प्रकार के झूलों के साथ जलपरी समेत विभिन्न मनोरंजन के साधनों का लोगों ने आनंद लिया।
फोटो 29 एमएएचपी 23 परिचय-कीरत सागर तट स्थित आल्हा मंच पर आल्हा गायन की प्रस्तुति देते गायक। सं
फोटो 29 एमएएचपी 23 परिचय-कीरत सागर तट स्थित आल्हा मंच पर आल्हा गायन की प्रस्तुति देते गायक। सं