फोटो 17 एमएएचपी 04 परिचय-रामलीला में भगवान राम को वन जाने से रोकते हुए विलाप करते राजा दशरथ। सं
महोबा। रामलीला के पांचवें दिन मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी के राजा दशरथ से दो वरदान मांगने और भगवान श्रीराम के वनगमन की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।
कलाकारों के सजीव अभिनय ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। अयोध्या से भगवान राम, माता सीता व लक्ष्मण के वन के लिए प्रस्थान का दृश्य देख श्रद्धालुओं की आंखें छलक उठीं।
पुराने रामलीला मैदान में चल रहे रामलीला का शुभारंभ परशुराम परमानंद वंदना से हुआ। इसके बाद कलाकारों ने मंथरा के कैकेयी को उकसाने, कैकेयी के दो वरदान मांगने और श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने के प्रसंग का मंचन किया।
पिता के वचन की मर्यादा रखने के लिए श्रीराम ने राजमहल के सुखों का त्याग कर वन जाना स्वीकार किया। माता सीता का पति के साथ वन जाने का संकल्प व लक्ष्मण का भ्रातृ प्रेम भी दर्शकों को भावुक कर गया।
राम की भूमिका में शिवपूजन तिवारी, सीता के रूप में पवन कुमार, लक्ष्मण के रूप में आदित्य द्विवेदी, दशरथ के रूप में अभिषेक द्विवेदी, कैकेयी की भूमिका में मुरलीधर मनमौजी और मंथरा के रूप में परशुराम ने प्रभावशाली अभिनय किया। व्यासपीठ पर मनीष तिवारी व तबले पर मुकेश सिंह ने प्रस्तुति दी। मंचन देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।