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हवेली दरवाजा मैदान में शहीदों की मिट रहीं निशानियां

Mon, 10 Aug 2015 01:08 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पे मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।  यह मशहूर पंक्तियां आजादी के दीवानों की शहादत के गवाह शहर के ऐतिहासिक हवेली दरवाजा मैदान पर सटीक बैठती हैं।
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ब्रिटिश हुकूमत ने इसी मैदान में अपने खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले 16 लोगों को फांसी पर लटका दिया था। लेकिन आज प्रशासन की अनदेखी और उदासीनता से हवेली दरवाजा मैदान स्थित अवैध अतिक्रमण से दिनोदिन सिकुड़ता जा रहा है।


शहीदों की कुर्बानी के गवाह इमली के पेड़ भी अब कुल्हाड़ी की भेंट चढ़ चुके हैं। अब तो कजली मेले के तीसरे दिन शहीद मेला आयोजित कर आजादी के दीवानों को यादकर रस्म अदायगी कर ली जाती है।
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वर्ष 1997 में तत्कालीन जिलाधिकारी उमेश सिन्हा ने ऐतिहासिक हवेली दरवाजा मैदान में शहीद स्मारक बनाने का निर्णय लिया था। उनके स्थानंातरण के बाद किसी भी अधिकारी ने शहीद स्मारक बनाने की सुध नहीं ली। इस मैदान में देश की आजादी के लिए ज्यौराहा निवासी कल्लू सहित 16 लोगों को फांसी पर चढ़ा दिया गया था।


शहीदों की याद में शहीद मेले का आयोजन शुरु किया गया। हवेली दरवाजा मैदान में अतिक्रमण के चलते जगह कम होेने से शहीद मेला के नाम पर खानापूरी की जाती है। प्रशासन की अनदेखी से जिले के ऐतिहासिक शहीद स्थल की पहचान खत्म होती जा रहा है।


इतिहासकार प्रो. एलसी अनुरागी, पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी स्वतंत्रता सेनानी के पौत्र अलताफ हुसैन का कहना है आजादी की लड़ाई में कुर्बानी देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों का परिवार आज गर्दिश में है।
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स्वतंत्रता सेनानी रज्जब अली का शहीद स्थल भी नहीं बनाने दिया जा रहा है। उनकी कब्र के ऊपर से गंदा पानी निकल रहा है और प्रशासन खामोश है।
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