कबरई (महोबा)। जिले के खनन एवं क्रशर उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में होने वाले अवैध उप खनिज परिवहन पर जल्द ही सख्त कार्रवाई की जाएगी। भंडारण लाइसेंस से जुड़े नियमों में इसी माह से महत्वपूर्ण सुधार लागू किए जा सकते हैं, जिससे जिले के खनिज उद्योग को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद है।
खनन एवं क्रशर उद्योग कल्याण समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ स्थित भूतत्व एवं खनिकर्म निदेशालय में खनिज सचिव माला श्रीवास्तव को अपनी समस्याओं से अवगत कराया। ज्ञापन में समिति के अध्यक्ष बालकिशोर द्विवेदी, महामंत्री देवेंद्र मिश्र और कोषाध्यक्ष रूपेंद्र सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में उपखनिज परिवहन के लिए ई-एमएम 11 और ई-प्रपत्र ‘सी’ विशेष सुरक्षा पेपर पर जारी होते हैं, जबकि अन्य राज्यों में लागू आईएसटीपी साधारण पेपर पर छपती है। इससे उत्तर प्रदेश में अवैध उपखनिज का परिवहन आसानी से किया जा रहा है। इसे रोकने के लिए आईएसटीपी को भी विशेष सुरक्षा पेपर पर जारी करने की मांग की गई है।
समिति ने अन्य राज्यों से उपखनिज लाने वाले वाहनों में उत्तर प्रदेश की तरह वीटीएस (व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम) लगाए जाने तथा उनकी रॉयल्टी की सूक्ष्म जांच की व्यवस्था लागू करने की भी मांग की। महोबा जिले में पर्याप्त उत्पादन के बावजूद, सीमावर्ती मध्यप्रदेश के छतरपुर जनपद से हो रहे अवैध खनन व परिवहन से जिले के क्रशर उद्योग को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। समिति ने मध्यप्रदेश की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी स्टोन क्रशर से निकलने वाली डस्ट पर 25 रुपये प्रति घन मीटर रॉयल्टी दर निर्धारित करने की मांग की।
साथ ही, प्रदेश के सभी विकास कार्यों, शासकीय निर्माणों और एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं में उत्तर प्रदेश के ही उपखनिजों के प्रयोग को अनिवार्य करने और उपखनिज भंडारण लाइसेंस में चरित्र व हैसियत प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की गई। इस पर सचिव ने इसी माह यह शर्त समाप्त किए जाने का आश्वासन दिया।