महोबा। मदरसे से साथी के साथ निकला छात्र झांसी से भटककर जालौन पहुंच गया। उसे एक व्यक्ति ने नया नाम देकर आश्रम पहुंचा दिया। चार साल बाद छात्र ने नाम पता बताया तो साधु ने ले जाकर उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया। बेटे को पाकर माता-पिता की आंखें भर आईं, उन्होंने साधु को धन्यवाद दिया।
मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले के मनुरिया गांव निवासी मुबीन ने नौ वर्षीय बेटे इसरार को महोबा शहर के शाहपहाड़ी मार्ग में संचालित मदरसे में पढ़ने भेजा था। वर्ष 2019 में इसरार साथी गुफरान के साथ लापता हो गया। दोनों बच्चे ट्रेन से झांसी पहुंच गए थे।
वहां से गुफरान लौट आया था लेकिन इसरार लापता हो गया था। मुबीन और उनकी पत्नी मुबीना बेटे की तलाश भटकते रहे। सुराग न लगने पर शहर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई थी।
भटकते इसरार को जालौन जिले के उरई निवासी एक व्यक्ति अपने साथ ले गया। उसने इसरार का नाम किशन रख दिया। उसे डकोर थाना क्षेत्र के मोहम्मदाबाद स्थित सत्यानंद ब्रह्मचारी के आश्रम में अपना बेटा बताकर छोड़ दिया था। वहां पढ़ने के साथ ही किशन (इसरार) साधु की सेवा में लगा रहा।
घुल मिल जाने के बाद उसने साधु से अपने माता-पिता का जिक्र किया और गांव का नाम बताया। इसके बाद साधु परिजनों की तलाश में लग गए।
बुधवार शाम साधु बच्चे मनुरिया गांव लेकर गए और परिजनों के सुपुर्द कर दिया। मुबीन ने खोया बेटा मिलने की सूचना पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस साधु, बच्चे और उसके परिजनों को कोतवाली ले गई। साधु ने पुलिस को बच्चे के आश्रम में पहुंचने की पूरी जानकारी दी। परिजन मसीहा बताकर साधु की जमकर तारीफ की और धन्यवाद भी दिया।