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गैर प्रांतों से आए श्रमिकों का बॉर्डर पर लग रहा जमावड़ा

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महोबा। यूपी-एमपी के बॉर्डर में गुरुवार को भी प्रवासी श्रमिकों का जमावड़ा लगा रहा। ट्रकों व निजी वाहनों से आए 500 प्रवासी श्रमिकों को कैमाहा बॉर्डर में रोककर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई। इसके बाद रोडवेज की बसें मंगाकर इन्हें बहराइच, मिर्जापुर, गोंडा समेत तमाम जिलों के लिए भेजा गया। प्रवासी मजदूरों को रास्ते के लिए लंच पैकेट भी वितरित किए गए।
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प्रवासी श्रमिकों के लिए कैमाहा बॉर्डर में चंद्रभान सिंह महाविद्यालय और मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी सर्किट हाउस को क्वारंटीन केंद्र बनाया गया है। यहां पर जिले के अध्यापकों व अन्य विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई। यहां पर प्रवासी श्रमिकों का पंजीयन करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा जांच की जाती है। साथ ही प्रवासी श्रमिकों के लिए जिला प्रशासन भोजन की व्यवस्था कराता है। यहीं वजह है कि कैमाहा बॉर्डर पर प्रवासी श्रमिकों का आना जारी है। प्रवासी श्रमिक गुरुवार को भी ट्रकों, पिकअप व अन्य वाहनों से घरों के लिए लौट रहे है। मजदूरों ने बताया कि तमाम ट्रक चालक उन्हें मध्यप्रदेश में ही उतार देते हैं। इससे उन्हें कैमाहा तक 25 किलोमीटर का सफर पैदल तय करना पड़ रहा है। कैमाहा से उन्हें अपने गृह जनपद जाने की सुविधाएं मिल रही हैं।
बहराइच निवासी रामहेत का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान मकान का किराया अदा नहीं कर सका, तो उसने मालिक ने मकान खाली करा लिया। 15 दिन तक फुटपाथ पर पड़े रहने के बाद घर लौटने का फैसला लिया। ट्रक से नागपुर तक आने के बाद कुछ दूर पैदल चले। फिर दूसरे ट्रक चालक ने एमपी के छतरपुर में उतार दिया। वहां से वह कैैमाहा बॉर्डर पर पैदल चलकर पहुंचे।
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गोंडा निवासी रामकुमार कहते है कि पांच साल से मुंबई में मजदूरी का काम करता था। लॉकडाउन में काम छिन गया। कई दिन तक भूखे रहने के बाद किसी ने कोई मदद नहीं की। जिस मकान में काम कर रहे थे। मकान मालिक ने भी भी उधार देने से मनाकर दिया। उसका और उसके भाई कहना है कि अब वह कभी भी भूलकर परदेस नहीं जाएंगे।
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