मदन सागर सरोवर के सुंदरीकरण के लिए 62 करोड़ की परियोजना केंद्र सरकार ने वापस उत्तर प्रदेश शासन को भेज दी है। अब प्रदेश सरकार अपने स्तर से सरोवर का सुंदरीकरण कराएगी। धनराशि स्वीकृत होने के बाद मदन सागर से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति हो सकेगी। 1182 में मनदवर्मन ने शहर के बीचोबीच मदनसागर सरोवर को निर्माण कराया था। 1963 में शहर की प्यास बुझाने के लिए पेयजल योजना के तहत मदन सागर के पास सीडब्ल्यूआर टैंक बनाकर शहर में पानी की आपूर्ति की गई थी। बढ़ती आबादी के साथ सरोवर की उत्तर दिशा में तालाब के किनारे ऊंचाई के हिस्से में मकान बन जाने के बाद नागरिकों ने अपने टैंक के पाइप और नालियाें का पानी मदन सागर में डाल दिया। जिससे कई सालों से लोग इसी प्रदूषित पानी का प्रयोग कर रहे है। एक साल पहले जल निगम ने 62 करोड़ रुपये की मदन सागर पेयजल योजना बनाकर शासन को भेजी थी। इसमें केंद्र सरकार से 60 फीसदी पैसा देना था। एक माह पहले आरएन जिंदल निदेशक एआरसीडी भारत सरकार ने पैसा देने से इनकार कर दिया और फाइल वापस लौटा दी। अब प्रदेश सरकार अपने स्तर से परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए विचार विमर्श कर रही है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही धनराशि आवंटित कर दी जाएगी। उधर, सीवर लाइन बनाकर गंदा पानी फेंका जाएगा। बंधान पर लाइटिंग
भी होगी। अधीक्षण अभियंता जल निगम ने योजना को मंजूर कर शासन को भेज दी है। शासन से स्वीकृति मिलते ही मदनसागर सरोवर का सुंदरीकरण कार्य शुरू कराया जाएगा।