महोबा। सिख समुदाय के दसवें गुरु, गुरु गोविंद सिंह का 351वां प्रकाश उत्सव धूमधाम से मनाया गया। बैंड बाजों की धुन के बीच शहर में शोभा यात्रा निकाली गई। सिख समुदाय ने गुरुद्वारा में पुष्पांजलि सभा कर गुरु गोविंद सिंह के बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। इसके बाद प्रार्थना (अरदास) और प्रसाद वितरण किया गया।
शुक्रवार गुरुद्वारा परिसर से बैंड बाजों के साथ निकाली गई शोभा यात्रा आल्हा चौक, तहसील चौराहा, सर्राफा चौराहा, ऊदल चौक से होकर रात 8 बजे गुरुद्वारा परिसर में समाप्त हो गई। शोभा यात्रा में जो बोले सो निहाल का उदघोष होता रहा।
जुलूस में आगे युवा अश्व नृत्य और पीछे महिलाएं सबद कीर्तन करती चल रही थी। पंच प्यारे हाथ में तलवार लिए पैदल चल रहे थे। कोतवाली के समीप बंटी सरदार, आल्हा चौक में बबली आदि ने लोगों के जलपान की व्यवस्था की।
पंच प्याराें के पैर में कंकड़ व अन्य वस्तु न चुभ सके इस गरज से महिलाएं आगे आगे नंगे पैर झाडू लगाती हुई चल रही थी। इससे पूर्व गुरुद्वारा में आयोजित पुष्पांजलि सभा में साहित्य परिषद के अध्यक्ष रामेश जैदका ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए अवतार लिया था।
इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, भाजपा जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह सेंगर, अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष प्रभात सुल्लेरे, दाऊ तिवारी, संतोष कुमार पटैरिया,जगप्रसाद तिवारी, सरदार हरमीत सिंह, परमजीत सिंह सहित तमाम वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए।
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हैरत अंगेज कारनामे देखकर दर्शक हुए दंग
सिख समुदाय द्वारा निकाली शोभा यात्रा में बंदा सिंह बहादुर अखाड़ा भरतपुर आकर्षण का केंद्र रहा। अखाड़े में आए नवयुवकों द्वारा दिखाए गए करतब देखकर दर्शक दांतों तले उंगली दबाने को मजबूर हो गए। कलाकारों द्वारा आल्हा चौक में तलवारबाजी देखकर लोग दंग रह गए। इसके बाद लकड़ी में लगे कीलाें के एक युवक लेट गया उसके ऊपर पुन: कीलेनुमा लकड़ी रखी गई उस पर दूसरा युवक लेट गया सबसे ऊपर लेट युवक पर बर्फ की सिल्ली रख कर घन से तोड़ी गई। लेकिन किसी भी युवक के शरीर पर कीले नहीं घुसे। जिसे देखकर लोग हैरत में पड़ गए।
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प्रकाश उत्सव पर छकाया लंगर
फोटो 05 एमएएचपी 10 परिचय-लंगर छकते लोग
गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश उत्सव पर शुक्रवार को गुरुद्वारा प्रांगण में लंगर का आयोजन किया गया। जहां पर हजारों लोगाें ने लंगर छका। सुबह 11 बजे से शुरू हुआ लंगर दिन में 3 बजे तक चलता रहा। गरीब वर्ग के लोगों ने भी लंगर खाया। प्रकाश उत्सव पर हर साल भव्य लंगर का आयोजन होने के कारण सुबह से आस पास के हजारों लोग गुरुद्वारा पहुंच गए। लंगर में भारी भीड़ जुटने के कारण कुछ लोगों को पीछे के हिस्से में मेट बिछाकर लंगर छकाया गया।
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सारा दिन रही सबद कीर्तन की धूम
गुरु गोविंद सिंह के प्रकाश उत्सव पर गुरुद्वारा में सारा दिन सबद कीर्तन और साध संगत की धूम रही। सुबह 6.30 बजे से आसा दी वार हजूरी जत्था चरन सिंह सबद कीर्तन किया। इसके बाद जसविंदर सिंह और सुरिंदर सिंह ने गुरु वाणी कीर्तन किया। अंत में सरदार जसपाल सिंह ने भी कीर्तन किया। इसके बाद अरदास की गई और सभी लोगों को प्रसाद वितरित किया गया।