श्रीनगर थाना क्षेत्र के ग्राम अतरारमाफ में कोटेदार ने अंत्योदय राशन कार्ड होने के बाद भी समाजवादी राहत पैकेट व खाद्यान्न नहीं दिया। इससे नाराज वृद्ध ने खुद को घर में कैद कर करके अन्न त्याग दिया। चार दिन बाद वृद्ध की हालत बिगड़ गई। इसकी जानकारी होने पर प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया और संबंधित अधिकारी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने वृद्ध को खाद्यान्न मुहैया कराते हुए इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद अतरारमाफ का कोटा निलंबित करते हुए कोटेदार अनुरुद्ध को जेल भेज दिया है।
बुंदेलखंड में प्रशासन पर भूख से मरने का कलंक लगने से बच गया। सूखे के हालात से जूझ रहे गरीबों के लिए वितरित कराए जा रहे समाजवादी राहत पैकेट व खाद्यान्न का सच सामने आ रहा है। ग्राम अतरारमाफ में गरीबी से जूझ रहे (65) वर्षीय प्रताप के परिवार में कुल सात लोग हैं। इकलौता बेटा गोपाल दिल्ली में रहकर मजदूरी करता है। गांव में प्रताप, उनकी पत्नी, बहू और बेटे के तीन बच्चे उसके साथ रहते हैं। गोपाल के भेजे पैसों से परिवार का भरण पोषण नहीं हो पाता है। अंत्योदय राशन कार्ड होने के बाद भी कोटेदार अनुरुद्ध ने न तो उन्हें समाजवादी राहत पैकेट का लाभ दिलाया और न ही खाद्य सुरक्षा के तहत खाद्यान्न दिया।
खाद्यान्न न मिलने से दुखी प्रताप ने घर में रहकर अन्न त्याग देने का फैसला कर लिया। चार दिन तक प्रताप ने कुछ नहीं खाया इससे उनकी हालत बिगड़ गई। परिजनों और गांव के लोगों ने इसकी सूचना प्रशासन को दी। जानकारी होते ही शुक्रवार को उपजिलाधिकारी सदर नंहकू, प्रभारी तहसीलदार कुंवर बिहारी निगम, नायब तहसीलदार कर्मवीर सिंह, थाना प्रभारी श्रीनगर राजीव यादव, पूर्ति निरीक्षक सुनील कुमार व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डा. पीडी अवस्थी वृद्ध के घर पहुंचे। चिकित्सकों ने वृद्ध प्रताप की जांच की इसके बाद इलाज के लिए जिला अस्पताल भेजा। वहीं अफसरों ने तत्काल गरीब परिवार को राहत पैकेट व खाद्यान्न दिलाया।
इसके बाद कोटेदार के खिलाफ जांच चली। शुक्रवार देर रात तक चली जांच के बाद अनियमितता मिलने पर कोटा निलंबित कर दिया गया। साथ ही कोटेदार अनुरुद्ध के खिलाफ कार्रवाई करते हुए जेल भेजा गया है।