कस्बे के दो बड़े तालाब सूख गए हैं। इनमें धूल उड़ रही है। जलस्तर खिसकने से हैंडपंप भी जवाब देने लगे हैं। इससे पेयजल का संकट गहरा गया है। पीने के पानी को लेकर लोग मुसीबत में हैं।
कस्बे का बड़े तालाब 79 एकड़ में फैला है। चौधरी तालाब का क्षेत्रफल 13 एकड़ है। दोनों तालाबों में पानी सूख गया है। दो साल से बरसात न होेने से जलस्तर नीचे खिसक गया है। इससे कुआं भी सूख गए हैं। हैंडपंप पानी छोड़ रहे हैं। ज्यादातर हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है।
इससे लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। इन तालाबों की खुदाई पर 25 करोड़ रुपये खर्च होने काअनुमान है। इस रकम की नगर पंचायत अध्यक्ष विमला देवी अनुरागी ने 27 जनवरी 2015 को शासन को पत्र भेजकर डिमांड की है। अभी तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ।
तालाबों की खुदाई सैकड़ों वर्ष पूर्व महाराजा छत्रसाल के शासनकाल में हुई थी। इसके बाद इन तालाबों की खुदाई नहीं हुई। तालाबों में सिल्ट जमा होने से इनकी भंडारण क्षमता समाप्त हो गई है। नगर पंचायत के पास तालाबों की खुदाई के लिए बजट नहीं है। तालाबों की खुदाई में व्यय अधिक होने के कारण नगर पंचायत खुदाई कराने में असमर्थ है।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने शासन से तालाब ख्ुादाई के लिए पैसे की मांग की है। इन्होंने बताया कि बजट मिलते ही तालाबों की खुदाई कराकर इनकी जल भंडारण क्षमता बढ़ाई जाएगी। इससे आने वाले दिनों में पेयजल समस्या से निजात मिल सके।