महोबा। लॉकडाउन के बाद दिल्ली सहित तमाम महानगरों में फंसे करीब दो हजार श्रमिकों को शनिवार रात को विशेष 20 बसों से महोबा लाया गया। रविवार शाम चार बजे तक बसों का आने का सिलसिला जारी रहा। जिससे महोबा रोडवेज परिसर में भीड़ का रेला जिला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। महानगरों से लौटे श्रमिकों की जांच भी कराई गई।
दिल्ली, नोएडा, आगरा, झांसी, मथुरा से शनिवार की रात को एक के बाद एक करके 20 बसों में करीब दो हजार श्रमिक शहर आए। महोबा आने के बाद यात्रियों को राठ, मुस्करा, कानपुर, बांदा, कर्वी, चित्रकूट के अलावा मध्यप्रदेश के छतरपुर, चंदला, खजुराहो व महाराजपुर के लिए यहां से 17 बसों से भेेजे गए। अकेली 12 बसें कानपुर भेजी गई। जिससे रविवार को सारा दिन रोडवेज में सुबह सात बजे से बसों को कानपुर सहित तमाम स्थानों पर भेजा गया। दिल्ली से महोबा 12 से 13 घंटें में बसें आईं। नोएडा से पांच स्लीपर कोच बसें भेजी गईं।
बाहर से आए सभी यात्रियों की सारा दिन जिला अस्पताल में जांच कराकर उन्हें घर भेजा गया। जांच कराने के बाद गांव पहुंचे ग्रामीणों ने भी कोई भी आपत्ति नहीं की। महानगरों से श्रमिकों का रेला उमड़ने के बाद इनकी जांच और नामों की लिस्ट बनाने में स्वास्थ्य कर्मियों को खासा दुश्वारियों का सामना करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त टीमें लगा दी है। इसके बाद भी शाम तक जांच का सिलसिला चलता रहा। करीब आठ दिनों के बाद रविवार को रोडवेज बसें चलने की खबर फैलते ही रोडवेज में लोगों का जमावड़ा लग गया। सुबह से शाम तक लोगों को यहां से दूसरे शहरों के लिए भेजा गया।
बच्चों के घर आने की जागी उम्मीद
महोबा। आठ दिन से बंद चल रही बसों के अचानक चलने से परिवार के लोग अपने-अपने बच्चों को लेने के लिए महानगरों की तरफ निकल गए। अब माता-पिता को अपने बच्चों के घर आने की उम्मीद जाग गई है। नोएडा, कानपुर, दिल्ली व लखनऊ में तैयारी कर रहे बच्चे लॉकडाउन के चलते फंसे थे। अब बच्चे जल्द ही मां-बाप से मिल सकेंगे।
पैदल चलकर सात दिन में पहुंचे गांव
खन्ना। लॉकडाउन के चलते परदेस में रह रहे लोगों की आवाजाही तेज है। कई दिन तक वाहनों की व्यवस्था न होने पर फंसे ग्रामीण महानगरों से पैदल ही चल दिए। जगह-जगह पुलिस की पूछताछ के बाद भी डग नहीं रुके। दिल्ली, नोएडा और आगरा से पैदल चलकर छह से सात दिन में आए ग्रामीणों को पहले नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खन्ना में जांच के लिए भेजा गया। इसके बाद उन्हें गांव जाने दिया गया। महीनों बाद घर लौटे बेटों और भाइयों को पाकर परिजन खासा खुश हैं। चिचारा निवासी सुनील कुमार, गोविंद, विनय कुमार, लक्ष्मी, बरभौली निवासी मइयादीन, महेश, सिरसीखुर्द निवासी श्याम बाबू, प्रेमिका ने बताया वह दिल्ली और नोएडा में काम करते थे। पैदल चलकर गांव आए हैं।
रोडवेज बस स्टैंड में बस से उतरते श्रमिक- फोटो : MAHOBA