संगमरमर के पत्थरों से बन रही कीरत सागर की सीढ़ियां
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ऐतिहासिक तालाबों की खुदाई और सुंदरीकरण के लिए खर्च हुए करोड़ों रुपये अब नजर आने लगे हैं। झमाझम बारिश से तालाबों में भरपूर पानी दिख रहा है। वहीं कीरत सागर की सूरत ही बदल गई है। तालाब में संगमरमर के घाटों के साथ रेलिंग भी बनाई गईं है। जिससे तालाब पहुंचने वाले लोगों की संख्या बढ़ गई है।
एक समय ऐसा था जब शहर के ऐतिहासिक कीरत सागर का अस्तित्व खतरे में नजर आने लगा था। तालाब के चारों ओर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा कर लिया था। साथ ही तीन वर्ष से तालाब में पानी की जगह धूल उड़ रही थी। प्रदेश सरकार ने इस बार जल संचयन योजना के तहत ऐतिहासिक तालाबों की खुदाई कराई। चंदेल कालीन कीरत सागर की खुदाई के साथ ही तालाब से कब्जा हटाया गया।
इतना ही नहीं प्रशासन ने तालाब के चारों ओर बंधी का निर्माण कराया। जिससे तालाब का क्षेत्रफल बढ़ गया। कीरत सागर तालाब का सुंदरीकरण युद्ध स्तर पर कराया जा रहा है। संगमरमर के पत्थरों से सीढ़ियां बनाई जा रही हैं, रेलिंग लगवाई गई है। बांध के चारों ओर इंटर लाकिंग कराई जा रही है। जिससे बारिश के दौरान जल भराव व कीचड़ न हो। तालाब का वैभव देखकर बुंदेलों के चेहरों पर मुस्कान नजर आ रही है।
महोबा। वर्ष 832 पूर्व चंदेल राजाओं और दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान के बीच हुए भीषण युद्ध का गवाह कीरत सागर है। इस युद्ध में चंदेल राजाओं ने दिल्ली नरेश को धूल चटाई थी। तभी से ऐतिहासिक कीरत सागर में रक्षा बंधन के बाद सात दिन तक मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें विभिन्न प्रांतों से हजारों की संख्या में लोग आते है।
महोबा। रक्षा बंधन के दूसरे दिन से ऐतिहासिक कीरत सागर में लगने वाले कजली मेले में चार चांद लगेंगे। पुराने वैभव में लौटे तालाब को देखकर लोगों को अलग प्रकार का अनुभव महसूस होगा। इस बार विभिन्न जिलों से आने वाले दुकानदारों व झूला संचालकों को भी व्यवस्थाओं का लाभ मिलेगा। मेले में अभी करीब डेढ़ माह का समय है। तब तक तालाब के सुंदरीकरण का कार्य भी पूरा हो जाएगा।