फोटो 27 एमएएचपी 30 परिचय-कस्बा बेलाताल में जवारा जुलूस के दौरान गाल में लोहे की सांग छिदवाता भक
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महोबा/बेलाताल/श्रीनगर। चैत्र नवरात्र के नौवें दिन शुक्रवार को जिलेभर में गाजे-बाजे के साथ जवारा जुलूस निकाले गए। सिर पर जवारे रखकर महिलाएं देवीगीत गाते चलतीं रहीं। इस दौरान भक्तोंं ने गालों में लोहे की सांग छेदकर मां के प्रति आस्था दिखाई। शाम को तालाबों में जवारों का विसर्जन किया गया। तब साधकों ने नौ दिवसीय व्रत तोड़ा।
शहर के शक्तिपीठ मां बड़ी चंद्रिका मंदिर, काली माता मंदिर, शीतला माता मंदिर, भटीपुरा, नयापुरा नैकाना समेत कई मोहल्लों के दिवालों से जवारा जुलूस निकाला गया। देवीगीत गाते हुए कीरत सागर पहुंचीं महिलाओं ने जवारे विसर्जित कर देवी मां से अपने सुखी जीवन का वरदान मांगा। बेलाताल संवाद के अनुसार रामनवमी पर जैतपुर में परंपरागत जवारे निकाले गए। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं और युवतियों ने हिस्सा लिया। महिलाएं सिर पर जवारे के रखकर देवी गीत गाते हुए चल रहीं। इस दौरान कई युवाओं ने अपनी श्रद्धा प्रकट करते हुए सांग छिदवाई। इसके अलावा श्रीनगर, कबरई, पनवाड़ी और चरखारी में भी जवारे विजर्सन करते हुए भक्तों ने डीजे की धुन पर खूब नृत्य किया।
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गालों में सांग छेदकर चलते रहे भक्त
महोबा। बुंदेलखंड में जवारे विसर्जन के दौरान भक्त माता के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा, शक्ति प्रदर्शन और मनोकामना पूर्ण होने की खुशी में मुंह में सांग (नुकीला सरिया) छिदवाते हैं। सांग छिदवाने वाले भक्त जवारे के विसर्जन करने जाती महिलाओं, भक्तों के साथ चलते हुए विसर्जन स्थल तक जाते हैं। यह एक कठिन तपस्या का हिस्सा है। यह मान्यता है कि सांग छिदवाने वाले भक्त पर माता की शक्ति का वास है और भक्त कष्ट सहन करके देवी को प्रसन्न कर रहे हैं। यह भी मान्यता है कि जिन भक्तों की मन्नतें पूरी होती हैं, वे जवारे विसर्जन के समय कठिन तपस्या के रूप में यह अनुष्ठान करते हैं। इससे उनके सभी दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। समाजसेवी शिवकुमार गोस्वामी बताते हैं कि यह बुंदेलखंड की लोक संस्कृति और नवरात्रि की एक प्राचीन परंपरा है। जिसमें जवारे विसर्जन के समय लोग सांग छिदवाकर माता को अर्पित करते हैं।