34 लाख रुपये की लागत से बने दो चेकडैमों की दीवारें पहली ही बारिश में दरक गईं। दो माह पहले बनाए गए चेकडैम की दीवारें दरक जाने की शिकायत पूर्व में ग्रामीणों ने अधिकारियों से की थी। लेकिन समस्या का निराकरण नहीं हो सका।
मई में महोबकंठ गांव के पास नाले में 17-17 लाख रुपये की लागत से बनाए गए दो चेकडैम पहली बारिश ही नहीं झेल सके। चेकडैमों में दरारें आ जाने से पानी तेजी से बर्बाद हो रहा है। बारिश के पानी को एकत्र करने के लिए बनाए गए चेकडैम बेकार साबित हो रहे हैं।
जिससे ग्रामीणों को चेकडैम का कोई लाभ नहीं मिल रहा है। कार्यदायी संस्था जलनिगम ने मई में चेकडैमों का निर्माण कराया गया था। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घटिया निर्माण कराए जाने के कारण दबाव पड़ने से चेकडैम में दरारें आ गईं। इसकी शिकायत ग्रामीणों ने जलनिगम के अधिकारियों से की है। जलनिगम के अवर अभियंता मनोज राजपूत का कहना है कि ठेकेदार का आधा भुगतान किया गया है। शेष भुगतान चेकडैम में आई दरारों की मरम्मत के बाद किया जाएगा।
चेकडैमों के निर्माण की जांच में शुरू हुआ खेल
चंद्रावल नदी में करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए चेकडैम की जांच में भी खेल शुरू हो गया है। उच्चाधिकारी और मुख्यमंत्री से शिकायत के बाद हुई जांच की कमान अधिकारियों ने कार्यदाई संस्था को ही सौंप दी है। ऐसे में घटिया निर्माण की जांच में हकीकत सामने आने की उम्मीद कम नजर आ रही है।
जिले से निकली चंद्रावल नदी को जीवंत करने के लिए प्रशासन ने कवायद की थी। जिसके तहत नदी की खुदाई कराने के साथ-साथ सिंचाई प्रबंधन और जल संचयन के लिए प्रदेश सरकार ने करीब पांच करोड़ से अधिक की लागत से नौ चेकडैम बनवाने के लिए पिछले वर्ष बजट जारी किया था।
लघु सिंचाई विभाग द्वारा बनावाए जा रहे चेकडैमों के निर्माण में खेल होने की शिकायत दो महीने पहले गहरा, बन्नीपुरा, सलुआ आदि के ग्रामीणों ने उच्चाधिकारियों सहित मुख्यमंत्री से की थी। उच्चाधिकारियों ने न तो मामले को गंभीरता लिया और न ही मौके पर जांच करने की जहमत उठाई। ग्राम सलुआ में घटिया निर्माण के एतराज पर जेई से ठेकेदारों द्वारा मारपीट करने और बाइक पंचर कर मोबाइल छीनने की घटना हुई थी। मामला खरेला थाने तक पहुंच गया था।
इसके बाद मुख्यमंत्री स्तर पर की गई शिकायत के बाद जांच के आदेश दिए गए। डीएम वीरेश्वर सिंह ने मामले की तकनीकी जांच कराने के लिए सीडीओ को निर्देश दिए। सीडीओ ने सीएम स्तर की शिकायत की जांच के लिए कार्यदाई संस्था के सहायक अभियंता को नामित कर दिया।
ऐसे में घटिया चेकडैमों के निर्माण की हकीकत सामने कैसे आएगी, इसको लेकर सवाल उठ रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि कार्यदाई संस्था से इतर किसी दूसरे विभाग को मामले की जांच सौंपी जाती, तो हकीकत सामने आती। उधर, लधु सिंचाई के सहायक अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। चेकडैम गुणवत्तापरक न पाए जाने पर संबंधित के विरुद्व कार्रवाई की जाएगी।