शहर में खेल मैदानों की संख्या पहले से ही कम थी, वहीं अधिकारियों की अनदेखी के चलते अब इन पर अवैध कब्जे और सरकारी भवन बनते जा रहे हैं। जहां लोग सुबह मैदानों में कोई व्यायाम करता तो कोई खेलता था। लेकिन खेल मैदानों पर कब्जे और इमारतें बन जाने से वह सिकुड़कर छोटे हो गए हैं। डाक बंगले के पास बने खेल के मैदान के चारों तरफ मकान और दुकानें बना दी गईं। वहीं एक हिस्से में साहित्य परिषद का भवन बना दिया गया। इतना ही नहीं इसी मैदान में एक ट्यूबवेल का भवन बना दिया गया है। जिससे शहर का इकलौता खेल मैदान सिकुड़कर रह गया है। इसी तरह हथकरघा के पास खेल मैदान में सरकारी इमारतें बना दी गई हैं। जहां पर अधिकारी और कर्मचारी निवास कर रहे हैं। दूर संचार के सामने डीएवी कॉलेज की फील्ड के आसपास भूमाफियाआें ने अवैध कब्जे कर लिए हैं। शेखूनगर खेल मैदान में पिछले दो दशक के अंदर पूरे में बस्ती बस गई है। जिससे वहां के खेल मैदान का नामोनिशान खत्म हो गया है। डिग्री कॉलेज का खेल मैदान भी इमारताें से सिकुड़ गया है। इसी तरह टीबी अस्पताल के सामने बड़ा खेल मैदान पर दबंगाें द्वारा किए गए अवैध कब्जे के चलते वहां पर नाम मात्र का मैदान रह गया है। इसी तरह गोखारगिरि मेला मैदान में तमाम लोगों ने अवैध तरीके से मकान बना लिए हैं।