जिले में करीब डेढ़ सौ एकड़ में पान की फसल की पैदावार की जाती है। औषधि गुणाें से भरपूर देसावरी पान पूरे देश के साथ ही विदेश को भेजा जाता है। लेकिन कुछ वर्षों से ओलावृष्टि और कोहरे पड़ने से फसल खराब हो जा रही है। जिससे किसानों की आर्थिक स्थित बेहद खराब होती जा रही है। जिससे पान किसानों ने अपने पुश्तैनी करोबार से नाता तोड़ लिया है। कोहरे के कारण पान लाल होकर लताओं से टूट कर गिरता जा रहा है। इस साल कोहरे के प्रकोप से करीब 60 फीसदी पान की फसल झुलसकर नष्ट हो गई है। इससे पान कृषकों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं लगातार तीन दिन से धूप न निकलने व लगातार कोहरा पड़ने फसल खराब हो रही है। पिछले कई दिनों से कोहरा न छंटने के कारण पान की फसल नष्ट होती जा रही है। इस समय पान लताओं में सबसे पुराने पत्ते तोड़े जाते हैं। बेहद कम एवं करारेपन के कारण यह पान बहुत पसंद किया जाता है। लेकिन कोहरे ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर दिया है।