मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट जल संचयन योजना से तालाब खुदाई में लीपापोती करने वाली कार्यदाई संस्थाएं जांच के दायरे में आने लगी है। आधा अधूरा काम करके धन हड़पने की शिकायत पर जिलाधिकारी ने यूपीपीसीएल के परियोजना प्रबंधक यूनिट-17 को दस दिन के अंदर मामले की जांच के निर्देश दिए है। डीएम ने ठेकेदारों को एक लाख से अधिक भुगतान न
किए जाने का आदेश दिया है। जिले में जल संचयन योजना के तहत शहरी क्षेत्र में सिंचाई विभाग, मौदहा बांध प्रखंड के साथ साथ ग्रामीण इलाकों के 90 तालाबों की खुदाई के लिए यूपीपीसीएल बांदा और रायबरेली यूनिट को कार्यदाई संस्था बनाया गया था। बेहद धीमी गति से तालाबों की खुदाई कराने से बारिश का दौर शुरू हो गया। जिससे तालाबों की आधी अधूरी
खुदाई हो सकी। ग्रामीण इलाकों के जागरूक ग्राम प्रतिनिधियों ने तालाब खुदाई में अंधेरगर्दी और लीपापोती की शिकायत डीएम वीरेश्वर सिंह से की थी। विकासखंड चरखारी के ग्राम कमलखेड़ा प्रधान शिवरतन सिंह ने दिए शिकायती पत्र में बताया कि यूपीपीसीएल रायबरेली यूनिट-17 के अंतर्गत ठेकेदार ने आधी अधूरी खुदाई कर महज डेढ़ लाख की लागत खर्च काम में
लीपापोती कर दी जबकि तालाब खुदाई के प्राक्कलन मुताबिक लागत छह लाख निर्धारित है। उन्होंने खुदाई में हेराफेरी करने वाले ठेकेदार का भुगतान महज एक लाख का भुगतान करने शेष भुगतान जांच के बाद किए जाने के निर्देश दिए है। डीएम की इस कार्रवाई से तालाब खुदाई कराने वाले ठेकेदारों में हडकंप मचा है।