महोबा। अपर जिला सत्र न्यायाधीश विजय शंकर उपाध्याय ने दहेज हत्या के मामले में मृतका के पति को दस साल की सजा और 25 हजार रुपये का जुर्माना ठाेंका। अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया। ग्राम गुढ़ा निवासी देवसिंह राजपूत ने अपनी बेटी शारदा की शादी कोतवाली महोबा के ग्राम बीजानगर निवासी नृपत राजपूत के साथ एक मई 2004 को की थी। शादी के बाद से ही पति व ससुरालीजन शारदा से लगातार दहेज की मांग कर उसे प्रताड़ित करते थे। 27 अगस्त 2007 को शारदा घर पर मृत पाई गई और उसके पास एक तमंचा और कारतूस पड़ा पाया गया था। मृतका के ससुरालीजनों ने पुलिस को युवती द्वारा तमंचे से आत्महत्या की जानकारी दी गई थी। विवाहिता की मौत की खबर पर पहुंचे मायके वालों ने बेटी की हत्या किए जाने का आरोप लगाते हुए मृतका के पिता नृपत, सास, ससुर और ननद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने चार्जशीट लगाकर अदालत में भेज दी थी। बुधवार को विद्वान न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की गवाह और बहस सुनी। अदालत में मायके पक्ष द्वारा गवाही से मुकर जाने के बाद भी न्यायाधीश ने अदालत ने नृपत राजपूत को हत्या का दोषी ठहराते हुए दस साल की सजा सुनाई साथ ही 25 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। इस मुकदमे के पैरवी सरकार पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की। अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में जेल भेज दिया है।