सिंचाई विभाग ने बजट के अभाव में पिछले वर्ष की तरह इस साल भी नहरों की मरम्मत और सफाई कार्य कराने के मामले में हाथ खड़े कर दिए है। अर्जुन बांध से जुड़ी नहरों की जर्जर दशा का इस वर्ष भी कायाकल्प होता मुश्किल दिख रहा है। कहीं जंगलों में तब्दील तो कहीं समतल हुई नहरों से सिंचाई के लिए पानी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों को इस वर्ष भी मायूसी हाथ लग रही है।
दैवीय आपदा और तबाही से बर्बाद कृषकों को इस वर्ष भी खरीफ और रबी की फसल के लिए नहरों का पानी नही मिल सकेगा। चरखारी के अर्जुन बांध से जुड़ी मुख्य नहर की शाखा माइनरों की टेल तक पानी न पहुंचने से सैकड़ों हेक्टेयर भूमि असिंचित रह गई थी। सिंचाई विभाग द्वारा जिले भर की नहरों की सफाई व मरम्मत कार्य के लिए मांगे गए बजट के सापेक्ष चार लाख की धनराशि मिलने से अर्जुन से जुड़ी अधिकतर नहरों की सफाई, मरम्मत नही कराई थी। पांच वर्षों से खरेला-पहरेथा माइनर, खरेला बसौठ माइनर, खरेला पुनिया माइनर एवं पहरेथा से बराए माइनर की दशा इतनी खराब है कि नहरों की पटरियां समतल मैदान बन गई है और जगह जगह नहर टूटी है। सफाई अभाव के चलते झाड़ियां और पेड़ नहरों में नजर आ रहे है, जिससे टिकरी, बिदावर, धवारी एवं चालीस फीसदी खरेला मौजा के कृषकों को सिंचाई सुविधा नहीं मिल पा रही है। इतना ही नहीं नहरों की टेल में बसे पहरेथा, कुंआ, बराय, पुन्निया, पच्चू का डेरा, बसौठ, परथनिया और कौहारी गांव के किसान हर वर्ष सिंचाई सुविधा से अछूते रह जाते है। कौहारी के प्रधान यदुनाथ सिंह, रविंद्र सिंह ने बताया कि दस वर्षों से न तो नहर की सफाई की गई और ना ही मरम्मत कार्य कराया गया, जिससे टेल तक पानी नही पहुंच रहा है। सिंचाई विभाग के अधिशाषी अभियंता विशंभर सिंह ने बताया कि पिछले वर्ष बजट कम मिला था, जिससे सफाई, मरम्मत कार्य नहीं हो सका और इस वर्ष अभी बजट नही है। जुलाई माह में पुन: बजट की मांग रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि टेल तक के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास होगा।