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Mahoba News: 10 साल से सिर पर था 3.30 लाख का कर्ज, 10 मिनट में छुटकारा

Sat, 09 May 2026 11:32 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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फोटो 09 एमएएचपी 16 परिचय-जनपद न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सालों पुराने वादों का
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महोबा। वर्ष 2016 में एक किसान ने कृषि कार्य के लिए केसीसी के जरिए 3.30 लाख रुपये का कर्ज लिया। जो समय के साथ अदा नहीं हुआ। दस साल से कर्ज के बोझ के तले दबे किसान ने शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में अपने इस कर्ज से दस मिनट के अंदर छुटकारा पा लिया। लोक अदालत में दो लाख रुपये जमा करने पर लोन समाप्त करने का समझौता हुआ। जिसे किसान ने फौरन मान लिया और टोकन मनी के तौर पर 1.30 लाख जमा कर शेष रकम बाद में देने के समझौते पर मामला निपटा।
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जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में कुछ ऐसे ही मामलों को लेकर लोग अपना हिसाब चुकता करने के लिए यहां पहुंचे। वर्षों से चले आ रहे कर्ज और लगातार बढ़ रहे ब्याज से परेशान लोगों ने यहां पर सुलह-समझौते के आधार पर अपने वाद को समाप्त कराया। हालांकि, आए हुए कुछ लोगों ने यह जरूर कहा कि इस बार छूट का प्रतिशत बैंकों की ओर से कम दिया गया। इस कारण कुछ लोग यहां से कर्ज का बोझ लेकर वापस लौटे जबकि कई लोगों ने इस समझौते का बहुत अच्छा बताते हुए अपना कर्ज अदा कर चैन की सांस ली।



पिता का कर्ज अदा करने पहुंचा बेटा, हिसाब चुकता

महोबा। ब्लॉक कबरई के बम्हौरी काजी गांव निवासी विक्रम ने बताया कि उनके पिता स्व. रामकरन ने वर्ष 2018 में एक लाख रुपये कर्ज बैंक से ग्रीन कार्ड के जरिए लिया था। जिसे समय पर अदा नहीं किया जा सका। इस दौरान पिता का निधन भी हो गया और यह मामला अटका रहा। धीरे-धीरे करके कर्ज की धनराशि 1,77,966 रुपये पहुंच गई। राष्ट्रीय लोक अदालत से नोटिस मिली और इस मामले को समझौते से समाप्त करने को कहा गया। वह शनिवार की सुबह 11 बजे लोक अदालत में पहुंचे और करीब एक घंटे बातचीत के बाद 80 हजार रुपये में मामला निस्तारित हो गया। उन्होंने यह धनराशि जमा कर अपने पिता का कर्ज अदा कर छुटकारा पाया।
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बेटे का कर्ज देने पहुंचे वृद्ध पिता

महोबा। थाना अजनर क्षेत्र के बड़खेरा गांव निवासी श्रीपत ने सोलर पैनल लगवाने के लिए वर्ष 2010 में बैंक से करीब 14,000 रुपये का ऋण लिया था। ऋण लेने के बाद श्रीपत ने इसे अदा नहीं किया और यह ऋण 16 साल के अंतराल में 24,754 रुपये पहुंच गया। इस ऋण को अदा करने के लिए श्रीपत के पिता जंगी प्रसाद राष्ट्रीय लोक अदालत पहुंचे। वह करीब 11.30 बजे पहुंचे और आधे घंटे के अंदर उन्हें छह हजार रुपये जमा करने पर ऋण समाप्त करने का प्रस्ताव बैंक की ओर से दिया गया। जिसे उन्होंने मान लिया। छह हजार रुपये तुरंत जमा कर जंगी प्रसाद ने बेटे का यह कर्ज खत्म कर लिया।


10 मिनट में लाखों रुपये के ऋण से छुटकारा

महोबा। ब्लॉक पनवाड़ी के भरवारा निवासी मनोज कुमार ने बताया कि वर्ष 2016 में उन्होंने केसीसी के जरिए 3.30 लाख रुपये का ऋण लिया था। यह रकम कृषि कार्य के लिए ली गई थी। समय बीता लेकिन ऋण अदा नहीं किया जा सका। जिस कारण यह कर्ज बढ़ता ही जा रहा था। राष्ट्रीय लोक अदालत में करीब 12 बजे पहुंचे और बातचीत हुई। दस मिनट में बैंक ने दो लाख रुपये जमा कर इस ऋण को समाप्त करने का प्रस्ताव दिया। जिसे स्वीकार कर लिया गया। उसने 1.30 लाख रुपये जमा किए और 70 हजार रुपये शेष बैंक में जमा करने का वादा किया।


बहन की शादी के लिए था कर्ज, 20 मिनट में हुआ चुकता

महोबा। थाना महोबकंठ के रिवई गांव निवासी प्रकाश ने बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने बैंक से केसीसी के जरिए बहन की शादी के लिए 70 हजार रुपये का ऋण लिया था। बहन की शादी हुई लेकिन कर्ज समय पर अदा नहीं कर सका। धीरे-धीरे यह कर्ज 2,12,397 रुपये तक जा पहुंचा। जिसे देखकर पसीने छूट रहे थे। राष्ट्रीय लोक अदालत में 12.30 बजे पहुंचा और करीब 20 मिनट की बातचीत के बाद 58 हजार रुपये देने पर ऋण समाप्त करने का प्रस्ताव बैंक ने दिया। जिसे तुरंत मान लिया गया। पांच हजार रुपये टोकन मनी जमा कर इस प्रस्ताव पर मुहर लगी। बताया कि 53 हजार रुपये बैंक में जमा कर ऋण को समाप्त करा लेगा।

फोटो 09 एमएएचपी 16 परिचय-जनपद न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सालों पुराने वादों का

फोटो 09 एमएएचपी 16 परिचय-जनपद न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सालों पुराने वादों का

फोटो 09 एमएएचपी 16 परिचय-जनपद न्यायालय में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में सालों पुराने वादों का

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