-कत्थक नृत्य और साइंस शो के नाम रही कजली मेले की दूसरी शाम
-आल्हा गायकों ने वीर रस से बांधा शमा, सूफी गजलों ने मोहा मन
-देर रात तक कार्यक्रम देखने के लिए हजारों की संख्या में जुटी रही मेलाप्रेमियों की भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। ऐतिहासिक कीरत सागर तट पर चल रहे सात दिवसीय कजली मेले की दूसरी शाम कत्थक नृत्य व साइंस शो के नाम रही। प्रिंसी सोनी एंड पार्टी ने भारत की सांस्कृतिक विविधता पर आधारित विशेष ग्रुप डांस पेश कर विविधता में एकता की झलक बिखेरी। आल्हा गायकों ने वीर रस से शमा बांधा तो सूफी गजलों ने दर्शकों का मन मोहा। सांस्कृतिक कार्यक्रम देखने के लिए देर रात तक दर्शकों की भीड़ जुटी रही।
कजली मेले की दूसरी शाम का शुभारंभ मुख्य विकास अधिकारी बलराम कुमार, एडीएम इंद्रनंदन सिंह और एसडीएम शिवध्यान पांडेय ने दीप जलाकर किया। पहली प्रस्तुति बृजेंद्र कुमार व अनुज सिंह ने आल्हा गायन के साथ की। उन्होंने वीर आल्हा-ऊदल की 52 लड़ाइयों का वर्णन करते हुए बुंदेलों में जोश भरा। इसके बाद संगीत शिक्षक जयनारायण सोनी ने सूफी गजल गायन से समा बांधा।
प्रिंसी सोनी एंड पार्टी के कलाकारों ने कत्थक नृत्य, कश्मीरी, पंजाबी, राजस्थानी, गुजराती, बंगाली और बुंदेलखंड का राई नृत्य की प्रस्तुतियों से सभी का दिल जीता। अलग-अलग राज्यों की पांरपरिक वेशभूषा, नृत्य शैली व संस्कृति को बच्चों ने मंच पर जीवंत रूप दिया। विभिन्न नृत्य शैलियों को पिरोकर ईशा, रिमझिम, रिशिका, वैष्णवी, आन्या गुप्ता, आराधना, अमित, राशि आदि ने विविधता में एकता की झलक बिखेरी।
इसके बाद अनिल प्रजापति एंड पार्टी ने शिव तांडव नृत्य की शानदार प्रस्तुति से माहौल भक्तिमय बना दिया। प्रांजल विश्वकर्मा एंड टीम ने लोक नृत्य तो अनीता सक्सेना ने लोक गायन की प्रस्तुति दी। राजधानी लखनऊ से आए धीरेंद्र पांडेय ने बुंदेली लोक नृत्य और मानसी सिंह ने बुंदेली गीत सइया मिले लरकइया मैं का करू की प्रस्तुति से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में आए आईआईटी बीएचयू के रिसर्चर मनोहर कुमार ने साइंस शो प्रस्तुत किया। जिसमें बच्चों के हाथ में केमिकल लगाकर चाकू से काटने के बाद कृत्रिम खून निकालकर दिखाना, बड़े आदमी की आवाज निकालने के लिए बच्चे को गुब्बारे से केमिकल पिलाना, कृत्रिम कोहरा, कृत्रिम धुआं, प्लाज्मा बल्ब जलाना, बच्चों के हाथ में केमिकल लगाकर आग जलाना, मैग्नीशियम जलाकर पानी का उपयोग करना, जलते मैग्नीशियम में सूखी बर्फ डालना आदि करके दिखाया। विज्ञान के चमत्कार देखकर दर्शकों ने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर खुशी जताई। अंतिम प्रस्तुति ज्ञानेश्वर मिश्र ज्ञानी लखनऊ एंड टीम की रही। आज के सुदामा कार्यक्रम में कलाकारों ने जीवंत मंचन किया। गरीबी की हालत में सुदामा अपने बचपन के मित्र भगवान कृष्ण के पास पहुंचते हैं। तब द्वार पाल उन्हें रोक लेते हैं लेकिन जैसे ही सुदामा के आने की खबर मिलती है तो भगवान कृष्ण दौड़े चलते आते हैं और सुदामा को गले से लगाते हुए पूरे आदर-सम्मान के साथ बैठाते हैं। इस दौरान कृष्ण और राधा की झांकी आकर्षण का केंद्र रही। इस दौरान एसडीएम कुलपहाड़ आदेश सिंह सागर, तहसीलदार चरखारी रामानंद मिश्रा, सेवायोजन अधिकारी आकांक्षा वाजपेयी, पर्यटन अधिकारी चित्रगुप्त श्रीवास्तव, पूर्ति निरीक्षक आलोक पटैरिया, शिक्षिका अपर्णा नायक मौजूद रहे।
-
गुदड़ी के मेले में जुटी महिलाओं की भीड़
महोबा। ऐतिहासिक कजली मेले के तीसरे दिन शहीद स्थल हवेली दरवाजा मैदान में शहीदों की याद में गुदड़ी के मेले का आयोजन हुआ। जिसमें महिलाओं की भारी भीड़ जुटी। मेले में महिलाओं ने सजी दुकानों से घरेलू उपयोग की सामग्री की जमकर खरीदारी की। वहीं बच्चों ने झूलों आदि का आनंद उठाया।
-
कजली मेले में लगी विकास प्रदर्शनी
महोबा। सूचना एवं जन संपर्क विभाग की ओर से कजली मेले में विकास से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई। जिसका उद्घाटन सीडीओ बलराम कुमार ने किया। प्रदर्शनी में केंद्र व प्रदेश सरकारी की योजनाओं और कार्यक्रम का सजीव प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनी चार सितंबर तक लगी रहेगी। उधर, शिक्षा विभाग की ओर से कजली मेले में शिक्षा सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें बच्चों ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुतियों से समा बांधा।
-
आज के मुख्य आकर्षण
महोबा। कजली मेले में सांस्कृतिक मंच पर मंगलवार को लालता प्रसाद तिवारी, उमाकांत द्विवेदी, उमाशंकर सेन व सुखराम कुशवाहा का आल्हा गायन होगा। राजेश कुमार तमूरा वादन, माही का सांस्कृतिक नृत्य, वंशिका गुप्ता का घूमर नृत्य, सुप्रिया गुप्ता का लोक नृत्य, रमेश पाल एंड पार्टी बांदा का दिवारी नृत्य और संपना बुंदेली का लाला हरदौल नाटक का मंचन होगा। मुख्य आकर्षण स्वरांजलि एंटरटेनमेंट ग्रुप का रहस्य द म्यूजिकल बैंड दिल्ली रहेगा।