पं. हरिशंकर नायक ने कहा कि मनुष्य को परोपकारी जीवन
व्यतीत करना चाहिए। सभी जीवाें पर दया कर भूखे, प्यासे प्राणियाें और
मनुष्याें की सेवा भोजन देकर करना चाहिए। उन्हाेंने कहा कि गरीबाें की सेवा
करने से ईश्वर प्रसन्न होते हैं। वे रविवार को कबीर आश्रम में आयोजित
सत्संग में बोल रहे थे।
उन्हाेंने कहा कि मनुष्य को अपनी आय का दस
फीसदी गरीबाें की सेवा पर खर्च करना चाहिए। पं. मेवालाल परदेसी और पं.
आशाराम त्रिपाठी ने कहा कि मनुष्य को व्यसन से दूर रहकर सदाचारी जीवन
व्यतीत करना चाहिए।
डॉ. एलसी अनुरागी ने कहा कि ईश्वर ने जीवाें पर
दया करने, मानव सेवा करने और परोपकारी बनने की शिक्षा दी। कहा कि सुखी
जीवन के लिए जीवाें पर दया करना अनिवार्य है।
उन्हाेंने कहा कि
धरती माता अपनी संतानाें को मरते देखकर और निरंतर होते अत्याचाराें को न
रोकने पर क्रंदन करती हैं। इस दौरान इंद्रजीत सिंह ने भजन करम गति टारै न
टरैा व तूने कबहूं कृष्ण न कह्यो... सुनाया। पूनम सिंह ने अखियां हरि दर्शन
को प्यासीं... भजन सुनाया।
इस मौके पर राकेश अनुरागी, कंछेदीलाल
पुरवार, किशोरदादा पुरवार, किशोरीलाल अनुरागी, हरप्रसाद, शिब्बू, कमलापत,
मंगीलाल साहू, ब्रजमोहन ताम्रकार सहित तमाम लोग मौजूद रहे।