फोटो 06 एमएएचपी 21 परिचय-मुख्य बाजार में लगी सब्जी दुकान से खरीदारी करते ग्राहक। संवाद
महोबा। आम आदमी की थाली से हरी सब्जियां गायब हो रही हैं। स्थानीय स्तर पर सब्जियों की आवक समय पर शुरू न होने से इन सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। हालांकि, टमाटर और मटर के दाम में पिछले दो दिनों से गिरावट देखने को मिली है।
सर्दी का मौसम शुरू होते ही आमतौर पर बाजार में हरी सब्जियों की भरमार देखने को मिलती है लेकिन इस बार हालात उलट हैं। सबसे अधिक परेशानी हरी सब्जियों के दाम को लेकर है। इनके दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सब्जी विक्रेता मालती साहू बताती हैं कि हर साल आसपास के गांवों से टमाटर, मटर, शाक-भाजी की आवक इस समय तक शुरू हो जाती थी लेकिन इस बार देर तक बारिश होने के कारण फसलें प्रभावित हुई हैं। अन्य जिलों से मंडी में जो सब्जियां आ रही हैं, उनके भाव काफी अधिक हैं। इस समय पहाड़ी आलू 20 रुपये किग्रा, देशी पुराना आलू 15 से 18 रुपये किग्रा के भाव से बिक रहा है, जबकि टमाटर का भाव 60 रुपये से 40 पर आ गया है। हरी मटर भी अब 100 रुपये किग्रा से घटकर 50 रुपये तक पहुंच गई है। हालांकि, पालक और मैथी की भाजी अभी भी 80 रुपये किग्रा के हिसाब से बिक रही है। चने की भाजी का भाव 100 रुपये किग्रा है। पत्ता गोभी व फूल गोभी के दाम भी 50 रुपये किग्रा से नीचे नहीं उतर रहे हैं, जबकि आमतौर पर इन दिनों 10-15 रुपये किग्रा तक दाम पहुंच जाते हैं।
सब्जी दुकानदार काशी बताते हैं कि इन दिनों हरी मिर्च, फूलगोभी और पत्तेदार सब्जियों की आपूर्ति सीमित है। आवक कम होने का सीधा असर सब्जियों के दामों पर पड़ा है। कोई भी पत्तेदार सब्जियां 80 रुपये प्रति किलो से नीचे दाम पर नहीं मिल रही हैं। गृहणी नीलम बताती हैं कि पहले जब वे बाजार जाती थीं तो इस मौसम में 150 से 200 रुपये में थैला भरकर सब्जियां ले आती थीं लेकिन अब एक थैला भरकर सब्जी लेने के लिए 500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।