महोबा। बड़े लड़इया गढ़ महुबे के, जिनसे हार गई तलवार... की गूंज के साथ वीररस में आल्हा गायन सुन बुंदेलोंं की भुजाएं फड़क उठीं। वीर आल्हा-ऊदल के शौर्य, पराक्रम और 52 गढ़ की लड़ाइयों का वर्णन सुना आल्हा गायकों ने सभी का दिल जीत लिया। मौका था वीर आल्हा की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का। जहां आल्हा सम्राट समेत विभिन्न आल्हा गायकों ने आल्हा की वीरता का बखान किया।
मुकुंद फाउंडेशन व वीणापाणि संगीत महाविद्यालय की ओर से शहर के रामालय में आल्हा संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ आल्हा के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। आल्हा सम्राट वंश गोपाल यादव ने आल्हा की वीरता का बखान किया। उन्होंने पानीदार यहां का पानी, आग यहां के पानी में की पंक्तियां वीर रस में सुनाकर बुंदेलों को महोबा के वीर आल्हा-ऊदल के पराक्रम से अवगत कराया। वीणापाणि संगीत महाविद्यालय की छात्रा संजना, सोनिका, पारुल और आरती ने तलवारबाजी के साथ आल्हा गायन की प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया।
मुकुंद फाउंडेशन के अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आल्हा गायक उत्तम सिंह, वंश गोपाल यादव, उमाशंकर आदि को सम्मानित किया। इस मौके पर एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, पर्यटन अधिकारी चित्रगुप्त श्रीवास्तव, कार्यक्रम संयोजक अबोध सोनी, पं. जग प्रसाद तिवारी, शिवकुमार गोस्वामी, मुकेश गुप्ता, अंचल सोनी, संतोष पटैरिया, नमन सोनी आदि मौजूद रहे। इसी तरह शहर के आल्हा चौक में आल्हा परिषद की ओर से आल्हा का जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान दीप जलाकर आल्हा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
इस मौके पर आल्हा परिषद के अध्यक्ष शरद तिवारी दाऊ, डॉ. सुशील शुक्ला, प्रेमनारायण यादव, रामकिशुन तिवारी, रामसेवक, मंगल रैकवार, प्रेमचंद्र साहू, डॉ. प्रभुदयाल आदि मौजूद रहे।