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ईमानदारी से कमाए गए धन पर होता है गोविंद का वास- आचार्य

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भागवत कथा का रसपान कराते आचार्य - फोटो : MAHOBA
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अजनर (महोबा)। कस्बा अजनर के बस स्टैंड में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन लखनऊ से पधारे आचार्य जितेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि ईमानदारी से कमाए गए धन पर गोविंद का वास होता है जबकि बेईमानी से कमाए गए धन के साथ कलयुग प्रवेश करता है। जिस स्थान पर भागवत कथा का आयोजन होता है। वहां भगवान स्वयं विराजमान रहते हैं।
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भागवत कथा में आचार्य ने पारीक्षत की कथा सुनाई। बताया कि पारीक्षत को गर्भग्रह में ही गोविंद के दर्शन हो गए थे। इसलिए पारीक्षत गोविंद का दर्शन करने वाला प्रथम दर्शक कहलाया। उन्होंने कहा कि कथा में श्रोता प्रथम होता है जबकि वक्ता द्वितीय होता है क्योंकि यदि कथा सुनने वाला नहीं होता तो वक्ता को सुनेगा कौन। उन्होंने बताया कि जब अर्जुन को घमंड आ गया कि हम महाभारत के विजेता हैं। तब कृष्ण ने इस घमंड को तोड़ने के लिए अर्जुन से गोपियों की रक्षा के लिए कहा। कृष्ण के जाते ही राक्षसों ने गोपियों को अपने कब्जे में कर लिया। तब अर्जुन को समझ में आया कि वह बिना गोविंद के कुछ नहीं कर सकता। गोविंद के आने पर अर्जुन से राक्षसों से मुकाबला कर गोपियों की रक्षा की। संगीतमय कथा में ढोलक पर हलकुट्टी विश्वकर्मा, ऑर्गन पर पुष्पेंद्र सिंह ने संगत दी।
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