महोबा। नोएडा के जेवर क्षेत्र में यमुना एक्सप्रेसवे पर महोबा आ रही स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की जिंदा जलकर मौत के बाद परिवहन विभाग ने सख्ती बढ़ा दी है। एआरटीओ दयाशंकर के नेतृत्व में डबल डेकर बसों की जांच में परमिट मानकों और बॉडी कोड की जमकर अनदेखी सामने आई। कार्रवाई के दौरान चार बसों को सीज किया गया जबकि तीन बसों के 40 से 55 हजार रुपये तक के चालान किए गए।
परिवहन विभाग की टीम ने प्रिंस ट्रैवल्स व राजा चौहान ट्रैवल्स की बसों की जांच की। जांच के दौरान कई बसों में अग्निशमन यंत्र नहीं मिले। पीछे की ओर यात्रियों की सुरक्षा व निगरानी के लिए निर्धारित बड़ा शीशा भी नहीं लगा था। कुछ बसों की बॉडी निर्धारित मानक से दो से तीन फीट तक बढ़ाई गई थी। इनमें अतिरिक्त डिकी बनाकर सामान रखने की व्यवस्था की गई थी। अधिकारियों के अनुसार बॉडी में इस तरह का बदलाव निर्धारित बॉडी कोड का उल्लंघन है।
जांच में यह भी सामने आया कि कई बसों के परमिट टूरिस्ट श्रेणी के हैं। इनका उपयोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक यात्रियों को ले जाने के लिए किया जाना चाहिए। बस संचालक एक-एक यात्री को सवारी के तौर पर लेकर उनका परिवहन कर रहे थे। इसे परमिट की शर्तों का उल्लंघन माना गया है। परिवहन विभाग की कार्रवाई के दौरान कई बसों के चालक बसें छोड़कर भाग गए। सीज की गई तीनों बसों को पनवाड़ी थाने में खड़ा कराया गया। वहीं तीन स्लीपर बसों का 40 से 55 हजार रुपये तक का चालान किया गया। एआरटीओ ने बताया कि परिवहन आयुक्त के निर्देश पर ऑपरेशन कवच 2.0 के तहत अभियान चलाया जा रहा है। नियमों की अनदेखी करने वाले बस संचालकों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी।