फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahoba News: मस्तानी महल की शान-शौकत से रूबरू होंगे विदेशी पर्यटक

Fri, 24 Mar 2023 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
विज्ञापन
विज्ञापन
महोबा। जिले में पर्यटन विकास को लेकर प्रदेश सरकार संजीदा है। पुराने किलों, इमारतों व महलों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की तैयारी चल रही है। राजस्थान की तर्ज पर यहां टूरिज्म सर्किट विकसित किया जाएगा। पर्यटन विभाग बेलाताल स्थित मस्तानी महल व बादल महल को पर्यटन विकास से जोड़ने के लिए तैयारी कर रहा है। अब वह दिन दूर नहीं जब यहां देशी-विदेशी पर्यटक मस्ती करते नजर आएंगे।
विज्ञापन

पर्यटन विभाग की इस पहल से पुरानी इमारतों को होटल के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पुरानी इमारतें भी सुरक्षित रहेंगी। इस योजना के क्रियान्वयन से बेलाताल कस्बे में स्थित सदियों पुराने बादल महल व मस्तानी महल के दिन बहुरेंगे। पीपीपी मॉडल पर इन धरोहरों को हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित किया जाएगा। इसकी मार्केटिंग व ब्रांडिंग के साथ ही प्रचार-प्रसार कर देशी-विदेशी सैलानियों को आकर्षित किया जाएगा। पर्यटन विकास से स्थानीय स्तर पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
मस्तानी महल व बादल महल को हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित करने को लेकर गुुुुजरात प्रांत स्थित अहमदाबाद की यूनिवर्सिटी ने सर्वे का काम पूरा किया है। यूनिवर्सिटी ने अपनी सर्वे रिपोर्ट यूपी के पर्यटन सचिवालय लखनऊ में सौंप दी है। इसके अलावा पिछले दिनों एएनबी कंसल्टेंट लखनऊ की टीम में शामिल आशुतोष व अलाउद्दीन खान ने मस्तानी महल व बादल महल का दौरा किया था। स्थानीय नागरियों से भी उन्होंने जानकारी एकत्रित की थी। इसके बाद अपनी सर्वे रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंपी थी।
विज्ञापन


बादल महल व मस्तानी महल को हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित किए जाने को लेकर गुरुवार को शाम साढ़े पांच बजे से साढ़े सात बजे शासन स्तर से वीडियो कांफ्रेंसिंग की जाएगी। इसमें बुंदेलखंड के सभी जिलों के उच्चाधिकारी शामिल होंगे। इन अधिकारियों से उनके सुझाव मांगे जाएंगे।

जैतपुर के महलों का अपना गौरवशाली इतिहास रहा है। मस्तानी महल स्थापत्य कला का नायाब नमूना है। महाराजा छत्रसाल द्वारा बनवाया गया ड्योढ़ी किला (मस्तानी महल) आज भी 17वीं सदी की गौरवगाथा को जीवंत रखे है। यह महारानियों की शान-शौकत की कहानी बयां करता है। जैतपुर के युद्ध में पेशवा एक महिला को भी लड़ते हुए देखकर उसके कद्रदान हो गए थे। पेशवा ने छत्रसाल से उस महिला योद्धा की मांग की। यह योद्धा मस्तानी थी, जो छत्रसाल की पुत्री थी। इस समय मस्तानी महल प्रशासनिक उपेक्षा व संरक्षण के अभाव में अपनी पहचान खोता जा रहा है। अब मस्तानी महल को विकसित कर कैफेटेरिया की सुविधा देने की घोषणा के बाद से यहां के लोगों में खासा उत्साह है।

बादल महल व मस्तानी महल को हेरिटेज सर्किट के रूप में विकसित करने की कवायद चल रही है। सर्वे का काम पूरा हो गया है। शीघ्र ही इन धरोहरों को पीपीपी मॉडल के रूप में विकसित करने को लेकर काम शुरू होगा।
विज्ञापन


-आरको मौर्या, पर्यटन अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें