कस्बे में खुला सेनेटरी नैपकिन उत्पादन एवं प्रशिक्षण
केंद्र और स्वच्छता उत्पादन केंद्र देश प्रदेश ही नहीं विदेश में भी धाक
जमा चुका है। इसकी कामयाबी से प्रभावित होकर विदेशी शोधकर्ता भी गुरुमंत्र
लेने आने लगे हैं।
गुरुवार को जर्मनी से आईं शोधकर्ता ने नैपकिन बनाने के तरीके और इसे महिलाओं तक पहुंचाने के बारे में जानकारी हासिल की।
जर्मनी
के हंबर्ग से आईं शोधकर्ता डेनिला स्क्रारोडर ने गुरुवार को श्रीनगर
पहुंचकर सेनेटरी नैपकिन उत्पादन एवं प्रशिक्षण केंद्र और स्वच्छता उत्पादन
केंद्र का जायजा लिया। साथ ही यहां बनाए जा रहे सेनेटरी नैपकिन के बनाने के
तरीके और इसकी ग्रामीण अंचलों में आपूर्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई।
डेनिला
ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि पिछले वर्ष भारत सरकार के निर्देश पर श्रीनगर
आए टेरिफ कमीशन की रिपोर्ट इंटरनेट पर देखकर यहां आने का निश्चय किया।
बताया
कि यहां आने से पहले उन्हाेंने जिले की निवर्तमान जिलाधिकारी डॉ. काजल और
अनुज कुमार झा से भी बातचीत कर यूनिटाें के बारे में जानकारी जुटाई।
बताया
कि उनकी संस्था जर्मनी के अलावा आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, दक्षिण
अफ्रीका में भी काम कर रही है। केंद्र की सराहना करते हुए कहा कि इस
उद्योग पर प्रदेश और देश को गर्व होना चाहिए। इससे रोजगार के साथ ही
माहवारी स्वच्छता के बारे में महिलाआें और किशोरियाें को जागरूक किया जा
रहा है।
उन्हाेंने चुप्पी तोड़ो अभियान की भी जमकर तारीफ की। बताया
कि यहां की रिपोर्ट तैयार कर जर्मनी सरकार को सौंपेंगी, जिससे वहां भी इस
प्रकार की यूनिट तैयार कर इस दिशा में काम किया जा सके। पंचायत उद्योग
केंद्र के प्रबंधक अनिल सिंह सेंगर ने उन्हें सारी जानकारियां उपलब्ध
कराईं।