महोबा। गैंगस्टर एक्ट के 19 साल पुराने मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एफटीसी 2016/विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट सर्वाेत्तमा नगेश शर्मा ने फैसला सुनाया। दोष सिद्ध होने पर पांच दोषियों को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दस-दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने पर तीन-तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
कोतवाली चरखारी के एसआई गोपाल कृष्ण गुप्ता 19 सितंबर 2007 को गश्त पर थे। उन्हें पता चला कि गैंग का सरगना संतोष कुमार निवासी गौरहारी का संगठित गिरोह है। गिरोह में रामकुमार, दयाराम, मैयादीन, रतना, मंशाराम व देवीसिंह सदस्य है। सरगना ने अपने साथियों के साथ मिलकर इलाहाबाद बैंक शाखा गुढ़ा में फर्जी तरीके से अपने साथियों के फोटो लगाकर बचत खाता खोले और फर्जी किसानों के क्रेडिट कार्ड तैयार कराकर रुपये निकाले। मामले में फर्जीवाड़े की रिपोर्ट दर्ज हुई थी।
पुलिस ने गैंग चार्ट तैयार कर सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए। न्यायालय में मामला विचारण के दौरान दो दोषियों रतना व मैयादीन की मौत हो गई थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए शेष पांच दोषियों संतोष, रामकुमार, दयाराम, मंशाराम और देवीसिंह को चार-चार वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।