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Mahoba News: जिला अस्पताल में आग से बचाव के इंतजाम अधूरे

Tue, 07 Oct 2025 12:18 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
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महोबा। राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (एसएमएस) हॉस्पिटल के ट्रॉमा सेंटर में रविवार देर रात अचानक आग लगने से सात मरीजों की मौत की घटना ने सभी झकझोर कर रख दिया है। महोबा जिला अस्पताल में भी आग से बचाव के पुख्ता इंतजाम नहीं है। ढाई साल पहले शुरू हुआ फायर सेफ्टी सिस्टम भी अभी पूरी तरह चालू नहीं हो सका। आग की घटना से बचाव के लिए यहां सिर्फ फायर सेफ्टी सिलिंडर ही उपलब्ध हैं। ऐसे में अग्निकांड की घटना हुई तो मरीजों को जान बचाना मुश्किल होगा।
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जिला अस्पताल में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए 90 लाख रुपये की लागत से फायर सेफ्टी सिस्टम लगाने का काम ढाई साल पहले शुरू हुआ था। इसके लिए ऑक्सीजन प्लांट के पास भूमि चिह्नित कर एक लाख लीटर क्षमता का वाटर टैंक का निर्माण कराया गया है। फायर सेफ्टी सिस्टम अस्पताल के सभी वार्डों, आईसीयू, ऑपरेशन थियेटर, इमजेंसी, ब्लड बैंक के समेत सभी जगह पर स्थापित होना है। वॉटर पाइप लाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया गया। शेष काम अधूरा है। अस्पताल में अलग-अलग स्थानों पर फायर सेफ्टी के छोटे-बडे 140 सिलिंडर हैं। हालांकि कुछ सिलिंडर में उसकी एक्सपायरी तिथि अंकित नहीं है। ऐसे में फायर सेफ्टी ऑडिट के नाम पर जिला अस्पताल में सिर्फ फायर सेफ्टी सिलिंडरों का ही ऑडिट किया जाता है। इन फायर सेफ्टी सिलिंडरों को रोगी कल्याण कोष की धनराशि से री-फिल कराया जाता है। उधर, सीएमएस डॉ. सुरेश कुमार का कहना है कि यहां भवन वर्षों पुराना है। फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित हो गया है। जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग किया जाएगा।

जिला अस्पताल में निकलने के लिए नहीं दूसरा दरवाजा
महोबा। 11 फरवरी 1995 को जनपद महोबा से पृथक कर महोबा को अलग जिला बनाया गया था। वर्ष 1997 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महोबा को जिला अस्पताल का दर्जा मिला। यहां पहले से मौजूद मुख्य भवन के अलावा बाद में दो मंजिला नए भवन का निर्माण कराया गया लेकिन इमरजेंसी के लिए यहां अस्पताल के वार्डों में दूसरे दरवाजे की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में एक ही गेट से मरीजों का आना-जाना होता है।
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महिला अस्पताल में नहीं है एनओसी
महोबा। जिला महिला अस्पताल में एनओसी नहीं है। इस नवीन भवन में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन वर्ष 2021 में शुरू हुआ। यहां भवन निर्माण के साथ ही फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित हुआ था। 25-25 हजार लीटर क्षमता की दो पानी की टंकियां हैं। यहां 42 कक्षों में फायर अलार्म सिस्टम लगाए गए हैं। साथ ही 62 छोटे व 70 बड़े फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित किए गए हैं। पूर्व में हुई जांच में कुछ खामियां मिलीं थी। इससे महिला अस्पताल को एनओसी नहीं मिली थी। अग्निशमन अधिकारी महेंद्र सिंह ने बताया कि जिला पुरुष अस्पताल की एनओसी है लेकिन महिला अस्पताल में निरीक्षण के दौरान कुछ खामियां मिलीं थीं। महिला अस्पताल की एनओसी नहीं है। जल्द ही चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
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