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कोरोना से कमजोर फेफड़ों को फेल कर सकती है आतिशबाजी

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महोबा। रोशनी के पर्व दीवाली पर अतिशबाजी वायु प्रदूषण को और बढ़ाएगी। इसके परिणाम घातक हो सकते हैं। कोरोना से कमजोर हो चुके फेफड़ों को यह अतिशबाजी फेल कर सकती है। ऐसे में बेहद सावधानी के साथ जागरूक होने की जरूरत है। दीवाली दीपों का पर्व है, यदि पर्व के दौरान आतिशबाजी से परहेज किया जाए तो इससे न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि दमा व सांस लेने संबंधी बीमारियों से बचा जा सकता है। अभी जिले में प्रदूषण की स्थिति 135 आईक्यू के इर्द गिर्द है।
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जिला अस्पताल के आंख, कान व गला रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र राजपूत बताते हैं कि कोरोना संक्रमण की रफ्तार भले ही धीमी हुई है लेकिन अभी कोरोना का खतरा टला नही है। ऐसे में आबो हवा को दुरस्त रखना ही होगा। अन्यथा कोरोना महामारी विस्फोटक रूप ले सकती है। ऐसे में दीवाली पर्व पर पटाखे छुटाने से बचा जाए। पटाखों का धुआं हवा में मिल जाएगा और यह धुआं सांस के माध्यम से फेफड़ोँ में जाता है। जिससे दमा व सांस लेने में परेशानी हो सकती है। सबसे ज्यादा परेशानी कोरोना से जंग जीत चुके लोगों को होगी। संक्रमण के चलते कमजोर हो चुके फेफड़ों में यह जहरीला धुआं घातक हो सकता है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. गुलशेर अहमद बताते हैं कि दीवाली पर आतिशबाजी से धुआं फैलेगा। धुआं कैसा भी हो वह कोरोना का संक्रमण बढ़ाने वाला होगा। ऐसे में सबसे जरूरी है कि वातावरण को शुद्घ रखा जाए। शोध बताते हैं कि जहां प्रदूषण ज्यादा है वहां कोरोना का संक्रमण बढ़ा है और मृत्यु दर भी अधिक है। तेज आवाज के पटाखों व अधिक धुआं देने वाली अतिशबाजी छोटे बच्चों के लिए अधिक नुकसानदायक है। इससे उनके आंख की रोशनी जाने का खतरा हो सकता है।
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