अपर जिला सत्र न्यायाधीश विजय शंकर उपाध्याय ने बेटी के साथ बलात्कार का प्रयास करने वाले एक पिता को पांच साल की सजा सुनाई, अदालत ने आरोपी पर 5000 रुपये का जुर्माना भी ठोंका। अदालत ने आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है।
महोबकंठ के ग्राम रिछारा निवासी भानुप्रताप अहिरवार की पत्नी की 2011 में मौत हो गई थी। आरोपी पिता माता पिता से अलग बच्चों के साथ रहता था। पत्नी की मौत के बाद वह बेटी को हवस का शिकार बनाना चाहता था। 13 वर्षीय बेटी ने पिता को जब कई बार मना किया तो, लेकिन आरोपी आए दिन बेटी को परेशान करता था। 28 अगस्त 2013 को भानुप्रताप ने बेटी को पकड़कर बलात्कार का प्रयास करने लगा। किशोरी के चिल्लाने पर उसके दादा व पड़ोसी पहुंच गए और किशोरी को छुड़ाया। पीड़िता ने अपने दादा छविलाल के साथ थाना महोबकंठ पहुंचकर पिता भानुप्रताप अहिरवार के खिलाफ बलात्कार के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज कराई। अदालत ने मुकदमे के दौरान आरोपी के पिता छविलाल और उसकी बेटी की भी गवाही देने से मुकर गई, बाद में पीड़िता के भाई गजोधर ने पिता के खिलाफ गवाही दी। अदालत ने दोनो पक्षों की बहस और गवाह सुनने के बाद भानुप्रताप अहिरवार को बलात्कार के प्रयास में आरोपी ठहराते हुए पांच साल की सजा और पांच हजार का जुर्माना ठोंका। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी। इस मुकदमे की पैरवी सरकार पक्ष से शासकीय अधिवक्ता प्रमोद पालीवाल ने की। अदालत ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।