ऐतिहासिक कजली मेला दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले मेें सारा दिन ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटने से मेला परिसर खचाखच भरा रहा। वहीं मेला परिसर में चल रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आल्हा सुनने को श्रोताओं की भारी भीड़ जुटी रही। रायबरेली से आई महिला आल्हा गायिका ने वीर रस की पंक्तियां प्रस्तुत कर श्रोताओं में जोश भर दिया। उधर सांस्कृतिक मंच पर बांदा जिले के बड़ोखर गांव से आई दीवारी नृत्य टीम ने हैरतअंगेज कारनामों को दर्शकों ने जमकर सराहना की।
कजली मेले के तीसरे दिन कीरत सागर तट हजारों लोगों की भीड़ का गवाह बना। यहां पर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किया गया बुंदेली नृत्य दर्शकों द्वारा सबसे अधिक सराहा गया। वहीं रात्रि में महिला आल्हा गायक ने आल्हा गायन की पंक्तियां सुनाकर दर्शकों में जोश भर दिया। मेले में पहली बार महिला आल्हा गायन का कार्यक्रम होने से आल्हा के शौकीन लोगों की भारी भीड़ जुटी। सांस्कृतिक मंच पर रात्रि में हुए कार्यक्रम में दीवारी नृत्य आकर्षण का लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। इस मौके पर कलाकारों द्वारा दिखाए गए हैरतअंगेज कारनामे दर्शकों ने खूब सराहे। कलाकारों के कारनामों के प्रसन्न होकर लोगों ने कलाकारों को ईनाम देकर पुरस्कृत किया। देर रात तक सांस्कृतिक मंच में भी कलाकारों ने बुंदेली विधा प्रदर्शित की। उधर कीरत सागर तट पर बाहर से आई दुकानों में सारा दिन भीड़ जुटी रही, वहीं ग्रामीण अंचलों से कजली मेला देखने आईं महिलाओं ने झूलों का लुत्फ उठाया।
आल्हा मंच पर आपसी भाईचारे का दिया संदेश
कजली मेले के मौके पर आल्हा मंच मेें राष्ट्रीय एकीकरण की संपन्न हुई बैठक में आपसी भाईचारा और कौमी एकता बनाए रखने की अपील की गई। बैठक में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई समुदाय के लोगों ने देश की एकता और आपसी भाईचारा, सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया। बैठक में महंत विशंभरदास, काजी-ए- शहर सैयद आफाक हुसैन, पादरी लेखराज, गुरुद्वारा प्रबंध समिति के अध्यक्ष सरदार दलीप सिंह, आल्हा परिषद के अध्यक्ष दाऊ तिवारी, शिवकुमार गोस्वामी, रामजी गुप्ता और अनिल अवस्थी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
ब्रेकडांस झूला बना आकर्षण का केंद्र
कजली मेले में पहली दफा आया ब्रेेकडांस झूला आकर्षण का केंद्र रहा। इस दफा सभी बड़े बड़े ऊंचे झूले, गोल झूले और पालकियां फेल हो गईं। दर्शक इस बार ब्रेकडांस झूले को खासा पसंद कर रहे हैं। तेज रफ्तार से चलने वाला बिजली का यह झूला तेज चलते चलते एक एक रुक जाता है और डांस की तर्ज पर इधर से उधर घूमने लगता है।