महोबा। महिलाओं को प्रसव के दौरान या बाद में यदि 500 ग्राम से ज्यादा रक्तस्राव हो जाए तो इसका असर केवल शरीर पर ही नहीं बल्कि हार्मोन के संतुलन पर भी पड़ता है।
रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल काॅलेज में झांसी की ओर से एक साल की अवधि में प्रसव के बाद अत्याधिक रक्तस्राव से पीड़ित 100 महिलाओं पर किए गए शोध में यह बात सामने आई है। शोध में महोबा समेत बुंदेलखंड के अन्य जिलों की महिलाओं को शामिल किया गया। जांच के बाद इनमें दो महिलाएं शीहान सिंड्रोम की शिकार पाई गईं। इन महिलाओं में थकान, बाल झड़ने, वजन घटने-बढ़ने और लो ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण दिखाई दिए।
झांसी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक नूतन अग्रवाल के नेतृत्व में डॉ. हिमांशु ने प्रसव पीड़िता की सुरक्षा और प्रसवोत्तर देखभाल के उद्देश्य से अधिक रक्तस्राव से पीड़ित महिलाओं पर यह शोध किया है।
इसके निष्कर्ष के बारे में डॉ. नूतन ने बताया कि इस रोग में मस्तिष्क की पिट्यूटरी ग्रंथि को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं मिल पाने से उसकी कोशिकाएं नष्ट होने से सिकुड़ जाती हैं। इससे आवश्यक हार्मोन बनने बंद हो जाते हैं।
पीड़ित महिला के शरीर में हार्मोन का संतुलन गड़बड़ा जाता है और उसे थायराइड, लो ब्लड प्रेशर आदि की समस्या हो जाती है। उन्होंने बताया कि इसके लक्षण धीरे-धीरे सामने आते हैं, इसलिए कई बार पीड़िता को इसके बारे में पता नहीं चल पाता। वह बताते हैं कि प्रसव के कुछ दिन बाद दूध कम बनने, कमजोरी, ठंड बर्दाश्त न होने आदि की दिक्कत होने लगती है।
इन समस्याओं से राहत हार्मोन की दवाओं से ही मिलती है। यदि प्रसव के समय रक्तस्राव की रोकथाम और समय पर उपचार मिल जाए तो इस रोग से बचाव संभव है।