महोबा। जलसंस्थान और जल निगम की आपसी खींचातान के चलते महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत की जा रही पानी सप्लाई की बिजली का बिल 19 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। बिल की अदायगी न होने से बिजली विभाग द्वारा काटे गए बिजली कनेक्शन का खामियाजा नागरिकों औ ग्रामीणों को भुगतना पड़ा। हालांकि बिजली विभाग ने अल्टीमेटम देकर बिजली तो जोड़ दी, लेकिन बिजली बिल की अदायगी न होने पर भविष्य में फिर बिजली काटी जा सकती है।
वर्ष 2008 में महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना के तहत उर्मिल बांध से महोबा शहर के अलावा श्रीनगर, सिजहरी सहित कई गांव में पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी। जल संस्थान द्वारा कनेक्शन देने से लेकर बिलों की वसूली का काम किया जाता है जबकि जल निगम द्वारा पाइपलाइन की मरम्मत व अन्य कार्य कराए जाते हैं। दोनों विभागों के अभियंता एक-दूसरे पर बिल जमा करने का ठीकरा फोड़ते रहे। जिससे करीब 12 साल में मात्र एक बार बिजली का तीन करोड़ रुपये जमा हुआ। शेष 19 करोड़ जमा न होने पर बुधवार की रात को उर्मिल फीडर का कनेक्शन काट दिया गया। जिससे पानी को लेकर हाहाकार मच गया। डीएम अवधेश कुमार तिवारी के निर्देश पर रात को बिजली जुड़वाई गई।
शासन ने जल निगम को दस साल के लिए महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना की मरम्मत की जिम्मेदारी सौंपी है और छह करोड़ रुपया भी आवंटित कर दिया है। शहरी क्षेत्र की पाइपलाइनों की मरम्मत की जिम्मेदारी जल संस्थान उठाता है। जल संस्थान के कर्मचारियों का छह माह से वेतन नहीं मिला। पानी के बिलों की वसूली से कर्मचारियों की तनख्वाह दी जा रही है। ऐसे में बिजली बिल का 19 करोड़ रुपये जल संस्थान कहां से देगा?
वीरेंद्र श्रीवास्तव
अधिशासी अभियंता
जल संस्थान, महोबा
जल संस्थान द्वारा पानी के बिलों की वसूली की जाती है। इसके बाद भी जल संस्थान बिजली का बिल जमा नहीं करता है जबकि जल निगम का कार्य पाइपलाइन बिछाने और पाइपलाइन का मेंटीनेंस करने का है। उनके यहां बिल जमा करने के लिए शासन से कोई पैसा नहीं आता है। फिर भी बिजली बिल की अदायगी के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। पैसा आने पर बिजली का बिल जमा कराया जाएगा।
संदेश सिंह तोमर
अधिशासी अभियंता
जल निगम, महोबा