ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण करते डीएम।
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गर्मी का मौसम शुरू होते ही पेयजल संकट गहराने और श्रीनगर के लोगों को सप्लाई का पानी न मिलने की शिकायत पर जिलाधिकारी सहदेव ने शुक्रवार की रात लगभग 10 बजे श्रीनगर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वहां कर्मचारियों से वाटर ट्रीटमेंट के लिए उपयोग किये जाने वाले फिटकरी चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर के अनुपात के बारे में जानकारी ली। प्लांट में लीकेज मिलने पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए पानी की बर्बादी रोकने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक तरफ जल संकट तो दूसरी तरफ जल की बर्बादी।
जिलाधिकारी अचानक रात में श्रीनगर के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से जानकारी ली। कहा कि पानी की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाए। इस मौके पर उन्होंने ट्रीटमेंट प्लांट का चैंबर, टंकी और श्रीनगर-महोबा पाइप लाइन के वाल्व को भी देखा। पाइप लाइन के सप्लाई वाल्व तथा टंकी में जगह-जगह लीकेज से पानी टपक रहा था। इस पर डीएम ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए मौजूद कर्मचारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि वाल्व की पैंकिंग को समय-समय पर बदला जाये और टंकी की मरम्मत की जाए ताकि पानी की बर्बादी को रोका जा सके।
इस दौरान डीएम ने विभागीय अधिकारियों से कहा कि एक तरफ महोबा में जल संकट है वहीं दूसरी तरफ जल की बर्बादी की जा रही है। जल संकट की समस्या से निपटने के लिए 24 घंटे तैयार रहें, इसमें लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी दौरान श्रीनगर के ट्यूबवैल के पानी छोड़ जाने की जानकारी मिलने पर उन्होनें ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि जल निगम से तकनीकी सहायता लेकर ट्यूबवेलों में और पाइप बढ़वाए जाएं, जिससे गर्मियों में जलापूर्ति सुचार रूप से हो सके। डीएम ने कहा कि हमारी प्राथमिकता में जिले को पेयजल संकट से बचाना तथा प्रत्येक व्यक्ति को पानी मुहैया कराना है। उन्होनें सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस कार्य में कोई हीलाहवाली न करें, अन्यथा की स्थिति में कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जायेगी।