बुंदेलखंड में सूखे के चलते बांधों, तालाबों के जवाब देने से जिले में चल रही 69 पेयजल योजनाओं में से 50 फीसदी पेयजल योजनाएं फ्लाप हो गई है। जिससे अब गांव-गांव में भी पानी को लेकर हालात भयावह होते जा रहे है। हालांकि जिला प्रशासन ने इस समस्या से निपटने के लिए गांवों में टैंकरों से पानी भेजने के इंतजाम किए है। जो नाकाफी साबित हो रहे हैं।
जिले में 11 पेयजल योजनाएं जल निगम, छह जल संस्थान और 52 पेयजल योजनाएं ग्राम पंचायतें संचालित कर रही है। 26 हजार की आबादी के लिए पांच करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई बेलाताल ग्राम समूह पेयजल योजना में छितरवारा, पचारा, सारंगपुरा, चपका, बेहार मुढारी, सुगिरा, भुजपुरा सहित 23 गांव को पानी आपूर्ति के लिए शामिल किया गया था। लेकिन बेलासागर के सूख जाने से पेयजल योजना धड़ाम हो गई है।
इसी तरह 11,000 की आबादी वाले ग्राम अजनर में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई पेयजल योजना आधे गांव की भी प्यास नहीं बुझा पा रही है। श्रीनगर में 20,000, चितइयन, ढुड़इयन में 3000, सिजहरी 7000, उरवारा 2800, की आबादी है। निसवारा में 4500 और भरवारा में 6000 की आबादी है। श्रीनगर पेयजल योजना, उरवारा पेयजल योजना, चितइयन पेयजल योजना, सिजहरी पेयजल योजना, खन्ना ग्राम समूह पेयजल योजना, पनवाड़ी ग्राम समूह पेयजल योजना, बिहार, निसवारा, भरवारा पयेजल योजना सहित करीब 69 पेयजल योजनाओं का गांव-गांव में संचालित है। जिससे पानी की आपूर्ति कराई जाती थी। इस साल सूखे के चलते बांधों, ट्यूबवेल और तालाबों के जवाब देने से पेयजल योजनाएं धराशाई हो गई है। करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई पेयजल योजनाएं पानी के अभाव में धड़ाम है। टैंकरों की व्यवस्था भी ग्रामीणों की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है।