महोबा। कथा व्यास आचार्य दिव्यांग भूषण बादल महराज ने
कहा कि भक्ति से भगवान की प्राप्ति होती है। मनुष्य की इंद्रियां चंचल
होती हैं। प्रभु की शरण लेने से भव्य सागर से पार पाया जा सकता है।
गुरुवार
को श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक ने कहा कि कुछ भक्त कहते हैं
कि मेरे राम जी सबसे बड़े हैं। कुछ कहते हैं मेरे श्याम और कुछ कहते हैं कि
मेरी मइया सबसे बड़ी हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण से ही
सब कुछ प्रकट हुआ। कहा कि वैसे तो भगवान के अनगिनत अवतार हैं, लेकिन मुख्य
रूप से 24 अवतार हैं। कथा वाचक ने कहा कि मनुष्य के जो दुख होते हैं, वो
उसके पुनर्जन्म की घटनाओं पर आधारित होते है।
मनुष्य सारे दोष इधर
उधर मढ़ते हैं। हमारे किए गए कर्मों से ही सुखद और दुखद फल प्राप्त होते
है। उन्होंने कहा कि कोई मनुष्य मानने को तैयार नहीं कि उसके द्वारा पाप
किया गया है।
कहा कि मनुष्य को अपने पापों को नष्ट करने के लिए
भगवान की परिक्रमा करनी चाहिए। कथा वाचक ने भजन जय विराट भगवान सुनाकर
भगवान की कहानी बताई।
उनके द्वारा सुनाए गए भजन श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी सुनकर भक्त अपने स्थान पर खड़े होकर तालियां बजाकर झूमने लगे।