गणेश महोत्सव के दौरान कई स्थानों पर पूजन अर्चन कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। सुबह से देर रात तक जारी रहे पूजन कार्यक्रम में गणपति को मोदक और मोतीचूर लड्डू का भोग लगाया गया।
शहर में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर भगवान श्रीगणेश जी की प्रतिमा स्थापित कराई गई हैं। शहर के पानमंडी, नगर पालिका के पास, जेल के पास, शारदा मंदिर आदि स्थानों गणेश प्रतिमा रखे जाने की सबसे प्राचीन परंपरा है।
पंडालों और घरों में गणपति बप्पा मोरया... के जयकारों की ध्वनि से महौल भक्तिमय हो गया। घरों में भी भक्तों ने विधि विधान से भगवान गणेश की पूजा में फल, फूल, दूरबा, मोदक आदि भेट किया।
भगवान गणेश व्यापक और परमब्रम्ह होने से प्रथम पूज्य है। रिद्धि के दाता भगवान गणेश बुद्धि के प्रदाता एवं इच्छित मनोकामना को पूरा करने वाले है।
श्रीनगर प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में दो स्थानों में पंडाल सजाकर भगवान गणेश की पूजा अर्चना की गई। सुबह शाम आरती व प्रसाद वितरण के बाद भजन कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
कुलपहाड़ प्रतिनिधि के अनुसार गणेश उत्सव पर सोनी गंज में वर्षा सोनी और अनलि कुमार अरजरिया के आवास में झांकी सजाई गई, जहां पर भारी संख्या में महिला पुरुषों ने दर्शन किए।