उप निबंधक कार्यालय महोबा में बड़े पैमाने पर धांधली की जा रही है। हालात ये है कि बैंकों द्वारा किसानों की भूमि भार मुक्त किए जाने के आदेश अपने लेटर पैड में न देने के बाद भी किसानों द्वारा फर्जी तरीके से भूमि भार मुक्त किए जाने संबंधी पत्र देने पर सब रजिस्टार ने बैंक से बिना पुष्टि किए किसान की भूमि भार मुक्त किए जाने का आदेश रिलीज कर दिया।
जबकि किसान का बैंक में लाखाें रुपये लोन का बकाया पड़ा है। दो मामले सब रजिस्टार कार्यालय के पकड़े जाने पर इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अनिल चतुर्वेदी ने सब रजिस्टार को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।
कोतवाली क्षेत्र के कुम्हड़ौरा गांव निवासी गुमान सिंह और इसी गांव के प्रताप सिंह ने इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक से चार साल पहले करीब साढ़े चार चार लाख रुपये लोन लिया था, लेकिन दोनों किसानों ने आजतक बैंक का कर्ज अदा नहीं किया।
उसके बाद भी दूसरे बैंक से लोन लेने के लिए फर्जी दस्तखत और फर्जी मोहर लगाकर बैंक की तरफ से किसानों की भूमि भार मुक्त किए जाने का पत्र सब रजिस्टार कार्यालय को दे दिया। उप निबंधक महोबा पीपी चौरसिया ने सादा पत्र के आधार पर ही किसान को भूमि भार से मुक्त किए जाने संबंधी आदेश रिलीज कर दिया।
इसकी भनक इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक के प्रबंधक अनिल चतुर्वेदी को लगने पर प्रबंधक ने तत्काल दूसरे बैंक से किसानों को लोन न देने की बात कही। साथ ही दोनों किसानों को इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक का नौ लाख रुपये का बकायादार बताया। साथ ही उप निबंधक महोबा को भेजे गए पत्र में बताया कि वह बैंक में भूमि बंधक है।
बैंक के किस पत्रांक, डाकवही, पंजीकृत डाक या कोरियर द्वारा भूमि मुक्त करने के लिए अवगत कराया गया है इसकी जानकारी दें। अपर जिलाधिकारी आनंद कुमार का कहना है कि मामला गंभीर है। ऐसे गलती किस तरह से हुई है। इसकी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
उप निबंधक द्वारा किसान की भूमि भार मुक्त किए जाने संबंधी आदेश रिलीज किए जाने से उप निबंधक की भी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। बैंक के बिना लेटर पैड और बिना पत्रांक नंबर के सादा कागज में बैंक की फर्जी मोहर के आधार पर आदेश रिलीज करने में निबंधन कार्यालय की भी सांठगांठ बताई जा रही है। उप निबंधक पीपी चौरसिया का कहना है कि किसने कॉपी रिसीव की है। इसका पता लगाया जाएगा साथ ही दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।